राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
आगरा। नेशनल चैम्बर चुनाव 2026 – 27 एक साधारण चुनाव न होकर जातिगत चुनाव में बंट गया। एक तरफ अग्रवाल समाज की ओर से मनोज बंसल तो दूसरी तरफ गुप्ता (माथुर वैश्य) की ओर से मनोज गुप्ता की लॉबी लामबंद हो गई। गुप्ता (माथुर वैश्य) की लॉबी का नेतृत्व चैम्बर पूर्व अध्यक्ष अतुल गुप्ता कर रहे थे। पिछले महीने 14 मार्च को चुनाव सम्पन्न हुए, जिसमें अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मनोज गुप्ता 19 मतों से हार गए और मनोज बंसल विजयी हुए।
मनोज गुप्ता के हारने पर उनके आकाओं ने जीते हुए प्रत्याशी एवं चुनाव प्रक्रिया पर धांधली के आरोप लगाए और अध्यक्ष पद पर काबिज होने का भरसक प्रयास किया, परंतु उन्हें मुँह की खानी पड़ी। उस दौरान इस लॉबी ने चैम्बर और चैम्बर की चुनाव समिति के बारे में खुलकर बुरा भला और आपत्ति जनक बयान दिए। जिससे चैम्बर की गरिमा तार-तार हो गई, जो आज भी आगरा में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अंतत: चैम्बर की छवि धूमिल होते देख चैम्बर के वरिष्ठ पदाधिकारी एकजुट हुए। उसके बाद मनोज गुप्ता ने चैम्बर से माँफी मांगी और लिखित मांफीनामा दिया। अब चैम्बर विचार कर रहा है कि ऐसे लोग जो चैम्बर की छबि खराब करने में लगे हैं, उनकी आगामी चुनावों में भगीदारी होनी चाहिए अथवा नहीं?
मनोज गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने चैम्बर चुनाव को ‘जातिगत चुनाव’ में धकेल कर चैम्बर की छबि खराब करने का काम किया है। कुछ लोगों का मानना है कि इस मामले में अतुल गुप्ता एण्ड कम्पनी की सक्रिय भूमिका रही,जो खुद को आरएसएस का 40 वर्ष पुराना संघी बताते हैं और कहते हैं कि सरकार हमारी है, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अब आगे देखना है कि चैम्बर अपनी साख बचाने के लिए क्या करता है।


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