बिहार सरकार का कदम स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला: डॉ. अशोक कुमार

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (PWA) उत्तर प्रदेश ने वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) पर गंभीर चिंता जताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) के सदस्य डॉ. अशोक कुमार ने इसे जहां स्वतंत्र पत्रकारिता पर बिहार सरकार का हमला बताया है, वहीं अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि तथ्यों को सामने लाना हर पत्रकार की जिम्मेदारी होती है। यह उसका प्राथमिक व नैतिक कर्तव्य है। ऐसे पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना स्वतंत्र पत्रकारिता व जनता के सच जानने के अधिकार पर सीधा हमला है।
मंगलवार, 15 जुलाई को विजयनगर स्थित पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश कार्यालय में एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन और वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ अशोक कुमार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि एसोसिएशन उन सभी पत्रकारों के साथ खड़ा है, जो अपने पेशे के चलते उत्पीड़न या भय का सामना कर रहे हैं। बच्चन ने कहा कि निडर व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के अधिकार की रक्षा के लिए PWA प्रतिबद्ध है। साथ ही संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि अजीत अंजुम के मामले में न्यायिक प्रक्रिया का पूरा पालन होना चाहिए। एक पत्रकार और उसके अधिकारों की किसी भी स्थिति में अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि बिहार के बेगूसराय जिले के थाना बलिया में देश के जाने-माने पत्रकार व यूट्यूबर अजीत अंजुम के खिलाफ 12 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर सरकारी काम में बाधा डालने व बिना अनुमति सरकारी दफ्तर में घुसने का आरोप है। एफआईआर भाग संख्या 16, साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मो. अंसारुल हक ने दर्ज करवाई है। बीएलओ का कहना है कि 12 जुलाई की सुबह करीब साढ़े 9 बजे वह बलिया प्रखंड सभागार में बीएलओ एप से वोटर लिस्ट की जानकारी अपलोड कर रहा था, तभी अजीत अंजुम अपने सहयोगी व कैमरामैन के साथ बिना अनुमति अंदर घुस आए।

दरअसल, अजीत अंजुम ने मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान से जुड़ी एक रिपोर्टिंग की और उसे अपने चैनल पर अपलोड कर बिहार में विशेष संवीक्षा अभियान (एसआईआर) के दौरान चुनावी प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं को उजागर किया था। इसी को लेकर बेगूसराय जिला प्रशासन ने आपत्ति जताई है और एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पत्रकार अजीत अंजुम पर झूठी व भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। प्रशासन का कहना है कि बलिया अनुमंडल में चल रहे वोटर लिस्ट सुधार कार्य के दौरान अजीत अंजुम ने बिना अनुमति सरकारी दफ्तर में जाकर वीडियो बनाया और इसे यूट्यूब चैनल पर प्रसारित कर दिया। इस वीडियो में कुछ गलत जानकारियां दी गई हैं, जिससे समाज में भ्रम और तनाव फैल सकता है।
बड़ा सवाल : पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने कहा है कि अजीत अंजुम एक अनुभवी और प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जिनका रिकॉर्ड जिम्मेदार और प्रभावशाली रिपोर्टिंग का रहा है। बच्चन ने कहा कि तथ्यों को सामने लाना किसी भी पत्रकार का प्राथमिक और नैतिक कर्तव्य होता है और इसे किसी भी हाल में ‘भ्रामक जानकारी फैलाना’ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता स्वस्थ लोकतंत्र की आधारशिला होती है। इस तरह की कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए एक बड़ी चुनौती भी है। साथ ही बच्चन ने सवाल उठाया है कि अगर इसी तरह एफआईआर दर्ज कराकर उत्पीड़न किया जाता रहा तो एक पत्रकार कोई ‘सच’ कैसे उजागर कर पाएगा?

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