देश के प्रथम ‘छंदबद्ध भारत के संविधान’ ग्रंथ का लोकार्पण

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। आईटीओ स्थित हिन्दी भवन सभागार में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉडर्स से प्रमाणित देश के प्रथम ‘छंदबद्ध भारत के संविधान’ ग्रंथ का देश के नामचीन साहित्यकारों के हाथों लोकार्पण हुआ। इस ग्रंथ में देश के 22 राज्यों के 142 रचनाकारों ने अपनी लेखनी की छाप छोड़ी है और इसका सम्पादन डॉ. ओमकार साहू, डॉ. सपना दत्ता सुहासिनी और डॉ. मधु शंखधर ने किया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ श्याम शशि सिंह ने की। डॉ. सुरेश सिंह, विधि भारती पत्रिका की संपादक व पूर्व न्यायाधीश डॉ. संतोष खन्ना, वरिष्ठ कवयित्री डॉ. रमा सिंह, वरिष्ठ बाल साहित्यकार शकुंतला कालरा, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. चेतन आनंद, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत के प्रमुख आलोक कुमार बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर सात अन्य पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया।
उपस्थित करीब 70 सहभागी रचनाकारों भावना तर्वेभव्या, राम रतन श्रीवास, डॉ. परमज्योत सिंह वेदी ’येशु’, मीना बंधन, चौधरी आशा, निर्मल जैन, डॉ. शिवकुमार श्रीवास, नीरामणी श्रीवास, निहार तारे, लक्ष्मीकान्त वैष्णव ‘मनलाभ’, गीता विश्वकर्मा ‘नेह’, सुखदेव सिंह राठिया, डॉ. माधवी गणवीर, सुमन ओमानिया, ऋषि कबीर मनहर, डॉ. नीतू दाधीच व्यास आदि को इस कार्यक्रम में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रमाण पत्र आदि से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये 10 साहित्यकारों की पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया, जिसमें मुख्य रूप से सपना दत्ता सुहासिनी की पुस्तक ‘बच्चों का कोना’, ग़ाज़ीपुर के खैराबारी से विनोद पाण्डेय की भोजपुरी काव्य संग्रह ‘तोपल नाँव लुकाइल रचना’ केन्द्र में रही।

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