मोरारी बापू ने हार्वर्ड से किया भारत के पवित्र ग्रंथों को संरक्षित करने का आग्रह

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
कैम्ब्रिज (मैसाचुसेट्स)। हार्वर्ड के सैंडर्स थिएटर में 16 से 24 अगस्त तक आयोजित आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू की ‘मानस गुरु प्रसाद’ राम कथा का 23 अगस्त को समापन हो गया। बापू ने हार्वर्ड से चारों वेदों, रामचरित मानस और वाल्मीकि रामायण को संरक्षित कर अपने पुस्तकालय में रखने का अनुरोध किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के शोधकर्ताओं को ये ग्रंथ आसानी से मिल सकें। वहीं नौ दिवसीय पूरी कथा का केंद्र बिंदु सत्य, प्रेम और करुणा के ‘त्रिभुवन सूत्र’ रहे। जिसमें भक्ति, विद्वत्ता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का संगम देखने को मिला।
तुलसी जयंती पर सैंडर्स थिएटर में तुलसी जन्मोत्सव एवं ग्लोबल अवॉर्ड्स समारोह आयोजित किया गया। साथ ही तुलसी, व्यास, वाल्मीकि और रत्नावली पुरस्कार प्रदान किए गए। नौ विद्वानों और सांस्कृतिक योगदानकर्ताओं को कुल आठ पुरस्कार प्रदान किए गए। यूसी बर्कले के प्रो. सैली जे. सदरलैंड गोल्डमैन और प्रो. रॉबर्ट पी. गोल्डमैन तथा ओसाका विश्वविद्यालय की प्रो. मडोका फुकुओका को वाल्मीकि पुरस्कार; कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रो. जॉन स्ट्रैटन हॉले, डॉ. अश्विन भाई कांतीलाल राजगोर और देवी चित्रलेखा को व्यास पुरस्कार; तथा यूटी ऑस्टिन के प्रो. रूपर्ट स्नेल और सामुदायिक नेता पीयूष भाई मेहता को तुलसी पुरस्कार प्रदान किया गया।
हार्वर्ड की प्रो. डायना एल. एक को तुलनात्मक धर्म के क्षेत्र में उनके कार्य के लिए रत्नावली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत से आए कथाकारों, विद्वानों, संगीतकारों और कलाकारों ने हार्वर्ड के अकादमिक समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर इस आयोजन में भाग लिया। जापान, नीदरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से विद्वान और परंपरा के साधक शामिल हुए तथा भारत की साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपराओं के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया।
राम कथा के मुख्य आयोजक पावन पोपट OBE ने कहा है, “इन नौ दिनों के समापन पर हमारे हृदय कृतज्ञता से भरे हुए हैं। हमने देखा कि विद्वान, श्रद्धालु और व्यापक समुदाय के सदस्य खुलेपन, सीखने और ज्ञान के भाव से एक साथ आए। यह सब सार्वभौमिक मूल्यों— सत्य, प्रेम और करुणा— की पृष्ठभूमि में हुआ।”

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