राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। अखिल भारतीय अनुबन्ध फाउंडेशन मुम्बई ने श्रीमती शकुंतला शर्मा एवं श्री रविदत्त शर्मा की स्मृति में काव्य संध्या का आयोजन किया। राजनगर एक्सटेंशन में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात वरिष्ठ कवयित्री डॉ रमा सिंह ने की। ग़ज़लकार ओमप्रकाश यती ‘मुख्य अतिथि’ और सुप्रसिद्ध कवयित्री पूनम माटिया ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में शामिल हुए। मशहूर ग़ज़लकार, फ़िल्म गीतकार और लेखक डॉ प्रमोद कुश ’तन्हा’ ने संचालन किया। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। ग़ज़लकार ओमप्रकाश यती ने ताजा मामलों पर कविता पढ़ी और खूब तालियां बटोरी, “निर्भया, श्रद्धा, शिवानी, अंकिता बन जाएगी, क्या पता कब कौन लड़की पीड़िता बन जाएगी…।”
काव्य संध्या में अनमोल शुक्ल अनमोल, सुरेन्द्र शर्मा, अनिमेष शर्मा, चेतन आनंद, मनोज अबोध, रूबी मोहंती, डॉ.सुधीर त्यागी, डॉ. अल्पना सुहासिनी, मंजु ’मन’ आदि ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को नयी ऊंचाइयां प्रदान की है। ‘अनमोल’ की पंक्तियां- मन से यादें कभी तेरी विस्मृत न हों, पंथ तेरे कभी कंटकावृत न हों…। पर खूब दाद बटोरी। सुरेन्द्र शर्मा ने भी ख़ूबसूरत शे’र से समां बांध दिया, ‘बिन आँधी रुपयों को हमने उड़ते देखा है…।
डॉ. सुधीर त्यागी के शे’र को भी ख़ूब दाद मिली- सोच रहा हूँ सच की खातिर दुनिया के हालात लिखूं, जागे एक मसीहा मुझमें अपनी भी औकात लिखूं। कवि एवं ग़ज़लकार अनिमेष शर्मा की ब्रजभाषा की हज़लों ने श्रोताओं को ख़ूब गुदगुदाया। रूबी मोहंती की रचना “ग्रे शेड” को भी ख़ूब वाहवाही मिली। डॉ. अल्पना सुहासिनी की छोटी बह्र की ग़ज़ल भी ख़ूब पसंद की गई। पूनम माटिया, डॉ. प्रमोद कुश ’तन्हा’ और प्रख्यात कवि चेतन आनंदन ने अपने गीतों और ग़ज़लों से ख़ूब तालियां बटोरीं- “दर्द की दास्तां कहते-कहते, रुक गयी फिर जुबां कहते-कहते…।”
एक आत्मीय काव्य संध्या को अपनी सहभागिता से सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए अखिल भारतीय अनुबन्ध फाउंडेशन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार कुश ’तन्हा’ द्वारा सभी कवियों, कवयित्रियों और शायरों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।


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