मेवाड़ में ‘गुणवत्ता अवधारणा’ पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में क्वालिटी सर्किल फोरम ऑफ इंडिया दिल्ली चैप्टर के सहयोग से गुणवत्ता अवधारणाओं पर आयोजित 34वें चैप्टर सम्मेलन में 16 संस्थानों की 42 टीमों के 222 सदस्यों ने भाग लिया और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से केस अध्ययन, सफलता की कहानियां अन्य संस्थानों, विद्यार्थियों और फैकल्टी से साझा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गेल इंडिया लिमिटेड कंपनी के चीफ जनरल मैनेजर एमके तिवारी ने कहा कि फ़ाइव एस से शुरू करके विभिन्न अवधारणाओं को आवश्यकता के अनुसार अपनायें।
क्यूसीएफआई के सचिव डॉ. पुरोहित ने बताया कि क्यूसीएफआई दिल्ली चैप्टर के चेयरमैन जी. वेंकटरमणन का विजन है कि हम उन शैक्षणिक संस्थाओं तक पहुंचें जो भविष्य की पीढ़ी को तकनीक और बौद्धिक कुशलता के साथ विकसित कर रही हैं, ताकि यह नई पीढ़ी भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाए।
कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य अतिथि इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि हमारा भी यही प्रयास है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही इतना सक्षम कर दिया जाए ताकि वह कॉरपोरेट वर्ल्ड में जाते ही चुनौतियों का सामना कर सकें। इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने मेवाड़ संस्थान के समाज के लिये किये गये 25 वर्षों के योगदान का उल्लेख किया और भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिये निरंतर किये जा रहे सुधार के प्रयासों की जानकारी दी।
इंस्टीट्यूशंस के प्लेसमेंट हेड हर्षवर्द्धन शर्मा ने मेवाड़ के विद्यार्थियों की रोजगार संबंधी उपलब्धियों की जानकारी दी। सम्मेलन के चेयरमैन एवं चीफ़ ज्यूरी अनिरुद्ध कौशिक ने कहा कि हमें आज यहाँ से कुछ नया सीखकर जाना है। उन्होंने चारों जजों संजीव भारद्वाज मिंडा, रेवती रमन सुब्रोस, सुनील कोहली बेल, सचिन गुप्ता टाटा पावर का परिचय दिया और कार्यक्रम की गतिविधियों की जानकारी दी।
सम्मेलन में भागीदार मिंडा ग्रुप, टाटा पावर, संधार, जेएसडब्ल्यू, मदरसन, रूप पोलिमर, मेट्रो, एनटीपीसी, जेसीबी और कृष्णा मारुति आदि संस्थानों के प्रतिनिधियों को क्यूसीएफआई ने अवार्ड भी दिये। कार्यक्रम में मेवाड़ के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। इस मौके पर मैनेजमेंट बोर्ड के सदस्य अर्पित महेश्वरी समेत मेवाड़ परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

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