राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। चिरंजीव विहार में साहित्याकर रमेश चंद भदौरिया के जन्मोत्सव पर उनके पहले गीत संग्रह ‘गीत तुम्हीं, संगीत तुम्हीं’ का विमोचन समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश सक्सेना ने की। अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के संस्थापक एवं सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ धनंजय सिंह ने इस अवसर पर कहा कि ‘गीत तुम्हीं, संगीत तुम्हीं’ में विषय की विविधता से सनातन संस्कृति की संपूर्ण झलक व गीतकार का सात्विक व्यक्तित्व परिलक्षित होता है।
उन्होंने कहा कि बेशक रमेश जी ने कम लिखा है, लेकिन जो भी लिखा है वह ठोस व क्रांतिकारी विचारधारा वाला है। रमेश कुमार भदौरिया संगीत के पुरोधा हैं। इसलिए उनके साहित्य में भी संगीत स्फुटित हुआ है।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकार महेश सक्सेना, वेद प्रकाश शर्मा ‘वेद’, विख्यात संगीतज्ञ पंडित हरिदत्त शर्मा, विष्णु सक्सेना, अमरेन्द्र रॉय आदि ने कवि के कृतित्त्व और व्यक्तित्व पर अपने विचार रखे। साथ ही डॉ भदौरिया के जन्मोत्सव पर उनके पहले गीत संग्रह ‘गीत तुम्हीं, संगीत तुम्हीं’ के प्रकाशन पर उन्हें बधाई दी।
विमोचन समारोह के साथ काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ गीतकार महेश सक्सेना, वेद प्रकाश शर्मा ‘वेद’, विष्णु सक्सेना, प्रवीण कुमार, सुदामा पाल, डी के बंसल आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस अवसर पर गीत संग्रह के गीतकार व सत्यमन संगीताश्रम के संचालक डॉ रमेश कुमार भदौरिया ने अपने काव्य एवं संगीत यात्रा के कई अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने कई गीतों की संगीतमयी प्रस्तुति भी दी, जिसे सभी ने करलत ध्वनि से सराहा। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता एवं युवा कवि प्रवीण कुमार ने किया। इस अवसर पर विश्राम सिंह, मधु सिंह, जय सिंह राघव, इंदिरा भदौरिया, नलिनी राघव, स्वाति शर्मा, पूजा शर्मा आदि उपस्थित रहे।


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