राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। दिगंबर जैन तीर्थ ऋषभांचल बर्धमान पुरम मेरठ रोड गाजियाबाद द्वारा ऋषभांचल स्थापना दिवस एवं 24वां ऋषभदेव पुरस्कार समारोह मनाया गया। पूज्य मॉ कौशल के सान्निध्य में जैनेंद्र सिद्धांत कोश के सृजन एवं जैन साहित्य में उनके योगदान विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई, जिसमें दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, टीकमगढ़, ललितपुर आदि से आए प्रमुख रूप से प्रोफ़ेसर श्रीयॉंश सिंघई, डॉक्टर टीकम चंद जैन, प्रोफ़ेसर वीरसागर जैन, डॉक्टर नरेंद्र कुमार जैन, पंडित जय निशांत जैन, डॉक्टर सुनील संचय, डॉक्टर ज्योति जैन, पंडित धर्म चंद जैन, शैलेंद्र जैन ने अपने-अपने विचार रखे।
माँ श्री कौशल ने कहा है कि जब से यहाँ पर मन्दिर में भगवान ऋषभदेव की मूर्ति स्थापित हुई है, तब से इस स्थान पर एक भी दुर्घटना नहीं हुई। जबकि मंदिर बनने से पहले आए दिन यहाँ दुर्घटनाएँ होती रहती थीं। आसपास के लोगों में धर्म की आस्था बढ़ी है। यह सब भगवान ऋषभदेव की कृपा से ही संभव हुआ है। भगवान ऋषभदेव ने हम लोगों को असि, मसि, कृषि आदि के साथ ही साथ अंक ज्ञान व लिपि ज्ञान दिया।
प्रवक्ता अजय जैन ने बताया कि स्थापना दिवस एवं 24वाँ ऋषभदेव पुरस्कार समर्पण समारोह में पूर्व सांसद डॉक्टर हर्षवर्धन मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि श्रीमती आशा शर्मा मेयर गाज़ियाबाद, बलदेवराज शर्मा राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश, केके शर्मा पूर्व विधायक, कृष्ण वीर सिंह सिरोही पूर्व विधायक, विकास तेवतिया चेयरमैन मुरादनगर, संजीव शर्मा महानगर अध्यक्ष भाजपा, अरविन्द कुमार सिंह अध्यक्ष पूर्वांचल समाज एनसीआर के साथ-साथ अनेकों गणमान्य उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि ऋषभदेव पुरस्कार डॉक्टर प्रो॰श्रीयॉंश सिंघई, ऋषभांचल पुरस्कार डा॰सुनील संचय,धर्म संवर्धन सम्मान श्री कुलदीप जैन पानीपत, मनोज जैन पानीपत, अविरल जैन कैलाश नगर दिल्ली, मात्र छाया सम्मान शुभम जैन ग़ाज़ियाबाद को प्रदान किया गया। ध्वजारोहण राकेश जैन टूडे टी, ज्ञान दीप प्रज्वलन नेम चन्द राकेश कुमार जैन, मंगल कलश विभोर जैन, जिनवाणी स्थापना विवेक जैन ने की।
समारोह में जीवेन्द्र जैन, आरसी जैन, सुनील जैन, अनिल जैन, दीपक जैन, धरम पाल जैन, एनसी जैन, जेके जैन, स्वागताध्यक्ष हेमचंद्र जैन, आर्किटैक्ट मुकेश जैन, अतुल जैन, सुधीर जैन, प्रदीप जैन, राकेश जैन,विनोद जैन, अशोक जैन, मनीष जैन, नीरज जैन, विनय कुमार जैन आदि का विशेष सहयोग रहा। मंच संचालन जीवेन्द्र जैन ने किया।


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