लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में बन रहे नए मोर्चों के आहट की सुनाई दे रही है। शनिवार को आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की तो राजनीति गलियारे में चर्चाएं तेज हो गईं। फिलहाल संजय सिंह ने इसे औपचारिक मुलाकात बताया है लेकिन चुनावी मौसम में कब औपचारिक मुलाकात राजनीतिक हो जाए, कहा नहीं जा सकता। इसीलिए आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच शनिवार को हुई मुलाकात से प्रदेश में एक नए सियासी समीकरण की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो दोनों दल मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ खड़ा हो सकते हैं।
दरअसल जिला पंचायत चुनाव में भाजपा ने जिस तरह से जिला पंचायत अध्यक्षों को चुनाव जिताया है, उससे सपा समेत अन्य विपक्षी दलों में इस बात को लेकर बेचैनी है कि अगर यही स्थिति रही तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबला करना कठिन होगा। खासकर मुख्य विपक्षी दल होने के नाते सपा को भी यह लगने लगा है कि भाजपा से लड़ने के लिए एक मजबूत विकल्प बने बिना सियासी समर को जीतना आसान नहीं होगा।
उधर, आम आदमी पार्टी भी प्रदेश में अपनी सियासी जमीन बनाने को लेकर एक मजबूत आधार बनाने की रणनीति में जुटी हुई है। सूत्रों का कहना है कि इसी रणनीति के तहत आम आदमी पार्टी सांसद संजय ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर गठबंधन की संभावना पर चर्चा की है। सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर जल्द ही संजय सिंह पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को अखिलेश से हुई बातचीत के ब्यौरा से अवगत कराएंगे। इसके बाद केजरीवाल और अखिलेश के बीच मुलाकात होगी। खुद संजय सिंह कहते हैं, ‘भाजपा ने जिस तरह से सत्ता के बल पर जिला पंचायत अध्यक्ष का मनमाने तरीके से चुनाव कराया है, उस मुद्दे पर ही चर्चा हुई है।’ फिर वह बात बदल देते हैं, ‘लखनऊ से बाहर होने की वजह से मैं अखिलेश को जन्मदिन की बधाई नहीं दे पाया था, इसलिए उनसे मिलकर बधाई देने गया था।’


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