राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
बाराबंकी। जिले के सफेदाबाद स्थिति हिंद मेडिकल कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। लोगों के जीवन में जानलेवा परिस्थितियों को समझने और उनके प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही 11 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। हर वर्ष इसके लिए एक विषय भी तय किया जाता है। इस साल का विषय है ‘कार्रवाई के माध्यम से आशा का सृजन’, जिसका सीधा-सा अर्थ है कि समाज, परिवार या परिवेश में मौजूद हर व्यक्ति ऐसे लोगों को अपना समय और सहायता देने का सोच और संवेदनशीलता अपनाकर जीवन सहेजने में मददगार बन सकता है।
प्रोफ़ेसर जेवी सिंह ने बताया की सहयोगी और मानवीय व्यवहार परेशानी के दौर में किसी के लिए बड़ा सहारा बन सकता है। समझना मुश्किल नहीं कि जिस देश में आत्महत्या के मुख्य कारण सामाजिक दबाव, आर्थिक परेशानी और पारिवारिक कलह से जुड़े हों, वहां समाज के लोगों का सहयोग और संबल जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।देखा जाए तो हालिया दौर की व्यस्त जीवनशैली ने लोगों को तनाव का शिकार बनाया तो कोरोना काल के ठहराव ने अवसाद के जाल में फंसा दिया है। दोनों ही परिस्थितियों में लोग भावनात्मक रूप से खुद अकेला महसूस करने के हालात में पहुंच गए। इस तरीके के लोगों की जानकारी होने पर उनसे संवाद कर उनके जीवन बचाए जा सकते हैं।


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