आपके लहजे तय करेंगे रिश्तों की उम्र

आपके लहज़े तय करेंगें,
‘प्रचंड’ रिश्तों की उम्र को…!
क्योंकि ख्वाइशों ने,
बसेरे जो कर लिए हैँ,
वीरान–ज़ेहन में…!!
जुगनूओं की तरह वो
आये थे जिंदगानी में,
अमावस की रात से पहले
ही वो उड़ लिए…!!
मेरी जिंदगानी में
थे, कभी वो मेरी,
किस्मत के प्रहरी…!
बिजूखा देखकर ही
वो खुद उल्टे पांव हो लिए..!!
प्रचंड, कायनात में, ख़ूबसूरती
रुख की ना देखो,
देखना है तो, प्रचण्ड
शख़्स की,
सीरत देखो..!!

कविता : प्रचण्ड

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*