राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद भाजपा अयोग्य ठहराए गए कर्नाटक के सभी 17 विधायकों को आगामी उपचुनावों में उतारने जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इन सभी विधायकों को उनकी पूर्व सीट से प्रत्याशी बनाए जाने को मंजूरी दे दी है।
उल्लेखनीय है कि यह फैसला बुधवार को हुई एक उच्चस्तरीय पार्टी बैठक में लिया गया जिसमें राज्य के वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे। मालूम हो कि पांच दिसंबर को राज्य की 15 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं जबकि हाई कोर्ट में मामला लंबित होने की वजह से दो सीटों पर उपचुनाव रोक दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा, ‘दलबदल विरोधी कानून को अधिकार दिए बिना हम यह कहकर अपनी पीठ थपथपाते हैं कि हमने तो कानून बना दिया। दलबदल विरोधी कानून में है क्या? जब वे चाहें तब इस्तीफा देने से रोकने के लिए और उन्हें आसानी से प्रभावित किया जा सकता है। जिस तरह आप प्रोत्साहित कर रहे हैं, आपके फैसले का कोई अर्थ नहीं है। अगर देश में लोकतंत्र को बचाना है तो कुछ हद तक अनुशासन दिखाना चाहिए। अगर दलबदल विरोधी कानून का सम्मान नहीं है तो इसका कोई मतलब नहीं है।’
पूर्व प्रधानमंत्री और जदएस सुप्रीमो एचडी देवेगौड़ा ने कहा, ‘अपनी समझ से मैं कह सकता हूं, येदियुरप्पा इस बात से चिंतित थे कि इन 17 लोगों (अयोग्य ठहराए गए कांग्रेस-जदएस विधायक) को कैसे संभालें। हमें उनकी (येदियुरप्पा) चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह अगले तीन साल और चार महीने के लिए सुरक्षित सरकार चला सकते हैं। सिद्दरमैया भी सुरक्षित हैं। कोई समस्या ही नहीं है। सरकार बनाने के लिए अब सिद्दरमैया और देवेगौड़ा के साथ आने का कोई सवाल ही नहीं है। विपक्ष के नेता के तौर पर वह सुरक्षित रहेंगे। अब कांग्रेस-जदएस का गठबंधन नहीं होगा।’


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