कोरोना वायरस: अमेरिका के राष्ट्रपति ने की राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा

राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के कारण अमेरिका में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है। दुनिया भर में कोरोना वायरस से 138,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और 5,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इसके बाद कई देशों की सरकारों ने अधिक सहायता का द्वार खोला है।
रोजमर्रा की जिंदगी पर कोरोना वायरस का प्रभाव दुनिया भर में गहरा गया है। कई देशों में पहली बार कोरोना वायरस के मामले पाये गये हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने यूरोप को महामारी का नया केंद्र बताया है। ज्यादातर स्कूल और व्यवसाय बंद कर दिये गए हैं। दुनिया भर में खेल ओयजनों को स्थगित कर दिया गया है। लोगों आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिये गये हैं।
वॉशिंगटन में ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में कहा, “आज मैं आधिकारिक तौर पर एक राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर रहा हूं। अगले आठ सप्ताह महत्वपूर्ण हैं।” ट्रम्प ने राज्यों और स्थानीय संस्थाओं को 50 अरब डॉलर की संघीय सहायता देने की घोषणा की है। कोरोना वायरस के संकट के खतरे को कम आंकने और धीमी प्रतिक्रिया के लिए ट्रंप को आलोचना का सामना करना पड़ रहा था।
ट्रम्प ने यूरोप के अधिकांश देशों के लिए अमेरिकी यात्रा प्रतिबंध की घोषणा के दो दिन बाद यह नया कदम उठाया है। इन यात्रा प्रतिबंधों से ब्रिटेन को छूट प्राप्त थी, लेकिन ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि संक्रमण वहां तेजी से बढ़ रहा है और इस छूट को बदला जा सकता है।
ट्रैवल बैन ने दुनिया भर में एयरलाइंस और ट्रैवल कंपनियों को नुकसान पहुंचाया है, जबकि वित्तीय बाजारों में इस सप्ताह घबराहट देखी गई है। वॉल स्ट्रीट की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट के बाद यू.एस. के तीन प्रमुख स्टॉक इंडेक्स ने शुक्रवार को 9 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। लेकिन वे फरवरी के मध्य में सूचकांक के रिकॉर्ड ऊंचाई से लगभग 20 प्रतिशत नीचे थे।
डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेबियस ने कहा कि अब चीन के अलावा यूरोप में बाकी दुनिया से भी ज्यादा मामले और मौतें सामने आई हैं। डब्लूएचओ ने विश्व स्तर पर 5,000 मौतों के आंकड़े को “एक दुखद मील का पत्थर” कहा है। डब्ल्यूएचओ के शीर्ष आपातकालीन विशेषज्ञ माइक रयान ने कहा कि सामाजिक मेलमिलाप रोकना कोरोनावायरस के प्रसार को धीमा करने के लिए एक ‘जांची-परखी विधि’ है, लेकिन ‘एक रामबाण’ नहीं है, जो कोरोना वायरस के प्रसार को पूरी तरह रोक देगा।

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