भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा है कि मीडिया शिक्षण के लिए वास्तव में देखा जाए तो इस समय कोई निश्चित मापदंड तय नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मेडिकल के क्षेत्र में भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद या इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च है, दंत चिकित्सा के लिए डेंटल काउंसिल है या इसी प्रकार अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए एक सुनिश्चित मापदंडों की व्यवस्था देश में दिखाई देती है, उसी प्रकार से मीडिया के लिए भी एक मीडिया काउंसिल होनी चाहिए, जोकि तय करे कि मीडिया क्षेत्र में काम करने वालों के लिए क्या मापदंड होंगे और क्या नहीं ।
मंगलवार को प्रोफेसर सुरेश ने कहा कि आज मीडिया शिक्षण में कोई भी रेगुलेटरी कमेटी नहीं है, जिसके अभाव में मूलभूत सुविधाएं जो इस क्षेत्र के लिए अति आवश्यक है, उनका अभाव हमें नजर आता है । कुछ संस्थाओं जैसे कि जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) को उदाहरण के लिए छोड़ दिया जाए तो आप देखेंगे कि कहीं कोई तय मापदंड मीडिया क्षेत्र में दिखाई नहीं देते।
उन्होंने कहा कि मेरा स्पष्ट और सीधे तौर पर मानना है कि चौथे स्तंभ के लिए भी देश में अलग से काउंसिल होनी चाहिए । आजकल कोई भी अपने घर में मीडिया शिक्षण शुरू कर देता है, पीछे से उन्हें मान्यता देने वाले भी जुड़ जाते हैं, मुझे लगता है कि यह ठीक स्थिति नहीं है, इससे तो मीडिया क्षेत्र में और गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया अध्ययन के लिए देशभर में एक मानक होने से मीडिया का स्तर बढ़ेगा, इसमें अच्छे लोग आएंगे और जिन्हें वास्तव में ही संवाद के माध्यम से सेवा करना है, वही आगे आकर इस क्षेत्र में अपना केरियर बनाएंगे ।


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