भगवान बुद्ध जयंती पर महंत नानक दास ने विश्व शांति का दिया संदेश

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नागौर। अखिल भारतीय कबीर मठ सदगुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान बड़ी खाटू द्वारा महात्मा बुद्ध की 2570वीं जयंती (बुद्ध पूर्णिमा) के अवसर पर एक विशेष विश्व शांति संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत (डॉ.) नानक दास जी ने इस अवसर पर दुनिया को शांति का सेदश देते हुए कहा कि आज पूरे विश्व को आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक सोच की जरूरत है। युद्ध करने से शांति नहीं आती और न ही आचार्य धर्म गुरु साधु संत समाज को शस्त्र उठाने की जरूरत है। धर्म गुरु, साधु-संत समाज आध्यात्मिक शक्ति, त्याग बल और पवित्र मन से विश्व में शांति ला सकते हैं।
उन्होंने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति में करुणा, प्रेम और दया का भाव पैदा करें, यही विश्व शांति का सच्चा संदेश होगा। डॉ नानक दास ने बताया कि मुगल काल में सदगुरु कबीर साहब बिना शस्त्र उठाए दुनिया को शांति, प्रेम, भाईचारा और सामाजिक समरसता विश्व शांति का संदेश देकर सत्य सनातन संस्कृति की रक्षा की थी। इसी तरह महात्मा बुद्ध के संदेश से भी पूरी दुनिया शांति महसूस करती है। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लें। बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर मानवता, प्रेम और सद्भाव का दीप प्रज्वलित करें।
संगोष्ठी में मध्य प्रदेश से आए बाल संगीतकार अभिषेक व शौरभ भाई ने डॉ नानक दास जी को महात्मा बुद्ध की प्रतिमा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर महाराज ने कहा कि ध्यान से मन की पवित्रता और शांति प्राप्त होती है। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर, सत्य, अहिंसा और करुणा के दूत गौतम बुद्ध के संदेशों (शांति, प्रेम, करुणा) को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाने का सेवा कार्य करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, दया, करुणा और शांति के दूत भगवान बुद्ध के महान संदेश सदैव हमें प्रेरित करते रहेंगे।
बुद्ध पूर्णिमा की पावन बेला पर महंत (डॉ.) नानक दास महाराज ने दुनिया के कल्याण के लिए संदेश देते हुए कहा, “बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि।“ आप सभी को शांति, प्रेम और ज्ञान की प्राप्ति हो। उन्होंने कहा कि शांति भीतर से आती है। इसे बाहर मत खोजो। बुद्ध के ध्यान, दान और मैत्री के भाव को अपनाएँ। जीवन में दुखों से मुक्ति और शांति का मार्ग, भगवान बुद्ध के उपदेशों में है। महात्मा बुद्ध के संदेश को अपना कर और उनके दिखाए मार्ग पर ही चलकर पूरी दुनिया में शांति कायम हो सकती है।

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