राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
गाजियाबाद। प्लाज़्मा थेरेपी कोरोना महामारी में तो काम कर ही रही है, उसके साथ-साथ इसने बधिरता में भी चमत्कार किया है। इस पर शहर के सुप्रसिद्ध ईएनटी विशेषज्ञ डॉ ब्रजपाल त्यागी पिछले तीन साल से कार्य कर रहे है। वे अब तक 100 से ज़्यादा लोगों को प्लाज़्मा थेरेपी के माध्यम से ठीक कर चुके हैं।
प्लाज्मा थेरेपी को मेडिकल साइंस की भाषा में प्लास्माफेरेसिस (plasmapheresis) नाम से जाना जाता है। इस थेरेपी से तात्पर्य ऐसी प्रक्रिया से है, जिसमें खून के तरल पदार्थ या प्लाज्मा को रक्त कोशिकाओं (blood cells) से अलग किया जाता है। इसके बाद यदि किसी व्यक्ति के प्लाज्मा में अनहेल्थी टिशू मिलते हैं, तो उसका इलाज समय रहते शुरू किया जाता है।
डॉ बीपी त्यागी ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी को पीआरपी (प्लटेलेट रिच प्लाज़्मा ) थेरेपी बोलते हैं। मरीज़ के ब्लड से प्लाज़्मा लिया जाता है और दूरबीन द्वारा कान के पर्दे के पीछे नस के पास लगाया जाता है, जिससे सुनने वाली नस मैं ताक़त आ जाती है और मरीज़ की सुनने की छमता बढ़ जाती है।
उल्लेखनीय है कि प्लाज्मा थेरेपी करने वाले डॉ बीपी त्यागी पूरे संसार में अकेले हैं। पूरी दुनिया से उनके पास मरीज़ आ रहे हैं और ठीक भी हो रहे हैं। डॉ त्यागी ने बताया कि यह बधिरता के छेत्र में अद्भुत इलाज है और इसके बाद महंगे यंत्र जैसे कोक्लीअर इंप्लांट की ज़रूरत नहीं होती। प्लाज्मा थेरेपी का खर्च प्रति इंजेक्शन क़रीब 10 हजार रुपये पड़ता है।
डॉ बीपी त्यागी पूरे विश्व में प्लाज्मा थेरेपी पर कार्य करने वाले पहले डॉक्टर हैं। वह इसे भगवान का दिया हुआ आशीर्वाद मानते हैं। उन्होंने इस टेक्नीक पर पेपर और केस स्टडीज़ लिखा है। जल्द ही इस पर डॉ त्यागी की एक पुस्तक भी आने वाली है।


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