- अनिल निगम
वैश्विक महामारी कोरोना का प्रकोप भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। कम्युनिस्ट देश चीन के वुहान शहर से पिछले वर्ष शुरू हुए इस वायरस ने आज विश्व के कई देशों को तबाह कर दिया है । आज भारत में भी कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं । ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ अनेक सामाजिक संगठन कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं । लेकिन सरकार के हर काम में मीनमेख निकालने वाले वामपंथी दल और उनके अनुषंगी संगठन आज कहीं छिप गए हैं। आज जहाँ आरएसएस, विद्यार्थी परिषद्, मदर टेरेसा परिवार, दीनदयाल शोध संस्थान, विहिप, सेवा भारती और अन्य सामाजिक संगठन के लाखों कार्यकर्त्ता गरीबों और मजलूमों की मदद कर रहे हैं, वहीं यह सवाल उठना स्वभाविक है कि भारत में काम करने वाले वामपंथी संगठन आखिरकार कहां चले गए हैं?
दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि वामपंथी संगठन लोगों की मदद करने की जगह देश में अफवाह फैलाने अथवा लोगों को उकसाने का काम कर रहे हैं । अक्सर वामपंथियों के निशाने पर रहे आरएसएस के स्वयंसेवक आज देश में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कोरोना वायरस जैसी महामारी में लोगों की मदद कर रहे हैं। आरएसएस के डेढ़ लाख से अधिक स्वयंसेवक लगभग 10 हजार स्थानों पर सेवा कार्य में लग चुके हैं। वे लोगों को कच्चा राशन दे रहे हैं तो कई जरूरतमंदों को भोजन खिला रहे हैं। कहीं गांवों को सैनिटाइज कर रहे हैं तो कहीं मास्क बांट रहे हैं। वे अब तक 10 लाख जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचा चुके हैं। यही नहीं, वे जगह-जगह पुलिस, स्वास्थ्य सेवा में लगे चिकित्सक, कर्मचारियों, परिचरिकाओं को भोजन, अल्पाहार इत्यादि की व्यवस्था कर रहे हैं ।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरएसएस को कट्टरवादी हिंदू संगठन बुलाने वाले, देश के हर छोटे-बड़े मुद्दे पर बयानबाजी करने वाले और गरीबों के हितैषी बनने का स्वांग करने वामपंथी आज लोगों की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे? आज विभिन्न प्रदेशों और शहरों में गरीबों और असहाय लोगों को मदद की दरकार है। इस विपत्ति काल में लोगों की जितनी अधिक मदद की जाय, वो कम है। यही कारण है कि समाज के समर्थ और दिशा प्रदान करने वाले लोगों की ओर जनता देख रही है।
कोरोना वायरस महामारी के कारण आज भारत कठिन दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक महामारी की चपेट में आ चुके अन्य देशों से सबक लेते हुए देश में 21 दिन के लिए यानी 14 अप्रैल तक लॉकडाउन कर रखा है। ऐसी परिस्थितियों में आरएसएस के स्वयंसेवक जगह-जगह पुलिस, स्वास्थ्य सेवा में लगे चिकित्सक, परिचारिकाएं, अन्य कर्मचारी को सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगे हैं।
दूसरी ओर समाज के कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इसमें सहयोग प्रदान करने की जगह समस्या को और बढ़ा रहे हैं। देश में लॉकडाउन होने के बाउजूद दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में यह अफवाह फैला दी गयी कि लॉक डाउन तीन महीने तक चलेगा। ऐसे में कर्मचारियों और मजदूरों को बहुत दिक्कत हो जाएगी । इस अफवाह को सोशल मीडिया के माध्यम से इतना फैलाया गया कि हजारों लोग दिल्ली सहित अन्य महानगरों से पलायन करने लगे, जिसके चलते लॉक डाउन के मकसद पर ही प्रश्नचिन्ह लग गया। इसी तरह लॉकडाउन होने के बाउजूद दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में जमाती समुदाय के लोग न केवल इकट्ठे हुए बल्कि नियमों की अवहेलना करते हुए वहां धार्मिक आयोजन किया। पता चलने पर दिल्ली पुलिस ने 28 मार्च को लगभग 23 सौ जमातियों को वहां से बाहर निकाला । तब तक सैकड़ों जमाती देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना का संक्रमण फैला चुके थे ।
यही नहीं, जमातियों ने इलाज करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थकर्मियों से भी जमकर बदतमीज़ी की । वामपंथी दलों और उसके अनुषंगी संगठनों ने इस दुर्भायपूर्ण घटना की भर्तसना करने की जगह ऐसे लोगों को भड़काने और इस संबंध में भी अफवाह फ़ैलाने का ही काम किया। मैं यहां एक बात स्पष्ट तौर पर कहना चाहता हूं कि जनता की भावनाओं से खेलने वाले दलों और संगठनों को यह यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता सब जानती है कि इस संकट के दौर में कौन समाज और देशहित में काम कर रहा है और कौन दिखावा कर रहा है । वह सही वक्त आने पर ऐसे लोगों को सबक अवश्य सिखाएगी ।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


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