बेहद सफल रहा डिजिटल गीत सम्मेलन-1

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता

गाजियाबाद। देवप्रभा प्रकाशन और काव्य कॉर्नर यूट्यूब चैनल द्वारा कोरोनाकाल में आयोजित देश का पहला डिजिटल गीत सम्मेलन-1 बेहद सफल रहा। हिंदी के विश्वविख्यात कवि डॉ. कुंअर बेचैन, राजेन्द्र राजन और डॉ. कविता किरण ने अपने दो बहुचर्चित सिग्नेचर गीत सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। उन्हें 200 से अधिक लोगों ने ऑनलाइन अपने घर बैठकर सुना।

डॉ. कुँअर बेचैन ने सिग्नेचर गीतों के बारे में बताते हुए मधुर स्वर में इन्हें गाया, ‘ जितनी दूर नयन से सपना, जितनी दूर अधर से हँसना, बिछुए जितनी दूर कुंआरे पाँव से, उतनी दूर पिया तुम मेरे गाँव से’ और ‘ नदी बोली समंदर से मैं तेरे पास आई हूँ, मुझे भी गा मेरे शायर मैं तेरी ही रुबाई हूँ’ जैसे यादगार और ऐतिहासिक गीत सुनकर श्रोता वाह-वाह कर उठे।

सहारनपुर के सुप्रसिद्ध गीतकार राजेन्द्र राजन ने ‘मैं रात रात भर जगा तुम्हे भुलाने के लिए, मैं पात पात झर गया बसंत लाने के लिए’ और ‘केवल दो गीत लिखे मैंने। इक गीत तुम्हारे मिलने का इक गीत तुम्हारे खोने का। सडक़ों-सडक़ों, शहरों-शहरों। नदियों-नदियों, लहरों-लहरों, विश्वास किये जो टूट गए, कितने ही साथी छूट गए, पर्वत रोये-सागर रोये, नयनों ने भी मोती खोये, सौगन्ध गुंथी सी अलकों में, गंगा-जमुना सी पलकों में, केवल दो स्वप्न बुने मैंने, इक स्वप्न तुम्हारे जगने का, इक स्वप्न तुम्हारे सोने का’ जब अपने मधुर कंठ से सुनाए तो लोग भावुक गए। उन्होंने इन गीतों के बारे में विस्तार से बताया।

फालना राजस्थान की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. कविता किरण ने अपने दो गीतों की रचना के बारे में सभी को जानकारी दी और उनका सस्वर पाठ किया। इन गीतों की कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-‘ अभी अभी जो खेलके आयी हाथी, घोड़ा, पालकी, अब भी मेरे अंदर है वो लडक़ी सोलह साल की।’ इसके अलावा वृद्धाश्रम नहीं होता गीत सुनाया। दोनों ही गीत कविता किरण की पहचान हैं। डिजिटल गीत सम्मेलन का संचालन देवप्रभा प्रकाशन के संस्थापक सुपरिचित कवि डॉ. चेतन आनंद ने किया। उन्होंने बताया कि 20 अप्रैल को डिजिटल गीत सम्मेलन-2 का आयोजन ऑनलाइन किया जाएगा। इसमें दिल्ली की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. मधुमोहिनी उपाध्याय, बाराबंकी के सुप्रसिद्ध युवा कवि श्री गजेंद्र प्रियांशु और कासगंज से सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ. अजय अटल अपने सिग्नेचर गीत प्रस्तुत करेंगे। अंत में काव्य कॉर्नर यूट्यूब चैनल की संस्थापिका-संचालिका डॉ. पूजा सिंह गंगानिया ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि ये सभी कार्यक्रम जल्द ही उनके यूट्यूब पर प्रसारित होंगे।

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