‘संकेत’ के तत्वावधान में ‘संविधान संशोधन अधिनियम-2019’ पर हुई चर्चा

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता

गाजियाबाद। बुधवार को ‘संकेत’ एक वैचारिक संस्था, ग़ाज़ियाबाद के तत्वावधान में ‘संविधान संशोधन अधिनियम-2019’ पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। एडवोकेट प्रवीण कुमार के शिवम टॉवर, आरडीसी राजनगर स्थित कार्यालय पर संपन्न हुई इस परिचर्चा की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता केपी सिहं ने की। परिचर्चा की शुरूआत करते हुए संजय कश्यप एडवोकेट ने कहा कि-नागरिकता संशोधन अधिनियम पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्ला देश से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के ऐसे लोगो को नागरिकता प्रदान करने के लिए अधिनियमित किया गया है जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आ गए हैं। ये लोग गरिमा पूर्ण तरीक़े से अपना जीवन जी सकें, यह इस क़ानून को बनाने का उद्देश्य है।

परिचर्चा में भागीदारी करते हुए रितेश शर्मा ने कहा कि यह क़ानून किसी भारतीय की नागरिकता छीनने के लिए नहीं है। सीए अंजना ग्रोवर ने कहा कि यह क़ानून मानवीय आधार पर सही पारित किया गया है। नरेंद्र नागर ने कहा कि यह कहना सही नहीं होगा कि पड़ोसी मुल्कों से आने वाले सभी ग़ैर मुस्लिम लोग धार्मिक उत्पीड़न के कारण ही भारत आए हों, वे बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में भी भारत आए हैं। संदीप त्यागी ने कहा कि जनसंख्या के आँकड़ों पर नज़र डालने से यह तथ्य ज़ाहिर है कि एक धर्म विशेष के लोगों की संख्या अनुमान से ज़्यादा बढ़ रही है। यह सत्ता पर क़ाबिज़ होने के इरादे से योजना बद्ध तरीक़े से किया जा रहा है।

विपिन त्यागी, प्रशान्त वत्स, मनोज कुमार, पुष्पेंद्र सिहं एडवोकेट, जितेंद्र कुमार एडवोकेट, आलोक कुमार एडवोकेट व कपिल चौधरी ने भी विषय पर अपने विचार प्रकट किए। परिचर्चा का संचालन एडवोकेट प्रवीण कुमार ने किया।

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