रमेश प्रसाद श्रीवास्तव / राष्ट्रीय जनमोर्चा
मुजफ्फरपुर। जागृति संस्था एवं सिया-दामोदर फाउंडेशन के तत्वावधान में स्वतंत्रता सेनानी एवं किसान नेता दामोदर प्रसाद सिंह की 21की पुण्य तिथि मनाई गई। नया टोला स्थित थियोसोफिकल लाज में बज्जिका एवं हिंदी के वरिष्ठ कवि व साहित्यकार उदय नारायण सिंह की अध्यक्षता में एक समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुजफ्फरपुर के उपमहापौर मोनालिसा, साहित्य मार्तण्ड उदय नारायण सिंह, डॉ देवव्रत अकेला, अधिवक्ता मुन्नी चौधरी, पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र द्वारा समवेत दीप प्रज्वलित कर किया गया।
आगंतुकों का स्वागत एवं विषय प्रवेश कराते हुए डॉ हरि किशोर प्रसाद सिंह ने कहा कि मैंने जितना अपने पिता श्री को जान पाया, उससे कहीं अधिक वे अनजाने रह गए। क्योंकि उनके जीवन का कैनवास इतना बड़ा था कि उसकी समग्रता को समेटना मेरे लिए बहुत कठिन काम है। वे एक यज्ञ पुरुष थे।
मंच संचालन समाज सेवी मोहन प्रसाद सिंह ने किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उदय नारायण सिंह ने कहा कि दामोदर बाबू यश के खेतीहर थे, फलतः अपनी यशो-काया के साथ आज भी वे जिंदा हैं और सदा जिंदा रहेंगे। इसीलिए हम आज उनकी पुण्य तिथि मना रहे हैं। उन्होंने देश एवं अपने समाज के लिए जो कुछ किया वह आज एक मिसाल है।
मुख्य अतिथि के तौन पर उपमहापौर मोनालिसा ने कहा कि दामोदर बाबू का व्यक्तित्व सागर की तरह गंभीर एवं हिमाचल की तरह ऊंचा था। उनके विचरों की विराटता उनके कर्म में समाहित थी। मुख्य वक्ता डॉ देवव्रत अकेला ने कहा कि दामोदर बाबू एक सजग किसान नेता और सच्चे अर्थ में देश प्रहरी थे। उनकी मिलनसारिता उन्हें औरों से विलग करती है। जबकि पूर्व महापौर सुरेश प्रसाद ने कहा कि दामोदर बाबू मेरे अभिभावक तुल्य थे। उनका सदाचार भरा जीवन मेरे लिए एवं आज की पीढ़ी के लिये प्रेरणास्पद है।
समारोह में पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र, राजेश शाही, अरविन्द वरुण, अधिवक्ता मुन्नी चौधरी, डां बीके मल्लिक, उमानाथ प्रसाद सिंह, मधुमंगल ठाकुर, गणेश प्रसाद सिंह और रमेश प्रसाद श्रीवास्तव ने भी अपने-अपने सार गर्भित विचार रखे।

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