राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। नांगलोई क्षेत्र में एक एनजीओ के सहयोग से रेस्क्यू ऑपरेशन कर बाल मजदूरी कर रहे 26 लड़के और 6 लड़कियों को आजाद कराया गया। पश्चिमी दिल्ली के इस इलाके में ऐसे कई कारखाने और फैक्टरियां हैं, जिनमें बहुत ही खतरनाक स्थिति में बाल मजूदरी कराई जाती है। यह इनपुट मिलते ही चाइल्ड लेबर, डीसीपीसीआर और एसडीएम पंजाबी बाग गुरुप्रीति सिंह के निर्देशन में पुलिस द्वारा कार्रवाई करते हुए कुल 32 बच्चों को छुड़ाया गया।
आजाद बच्चों की उम्र 7 से 15 वर्ष के बीच है। रेस्क्यू के दौरान मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (सीडीएमओ) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देख-रेख में सभी बच्चों का मेडिकल और कोविड टेस्ट किया गया। इन बच्चों से फैक्ट्री संचालक बहुत कम पैसे में मजदूरी करा रहे थे। एसडीएम ने बताया कि बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘सहयोग केयर’ की ओर से इनपुट मिला था कि नांगलोई इलाके में कई ऐसी फैक्टरियां चल रही हैं, जिसमें बाल मजदूरी कराई जा रही है। शुक्रवार, 17 सितम्बर को छापामार कार्रवाई की गई और 26 लड़के व 6 लड़कियों को छुड़ाया गया। उन्होंने कहा कि शोषण किसी भी तरह का हो, खतरनाक होता है। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ता है।
बच्चों को बाल मजदूरी से बचाने वाली संस्था ‘सहयोग केयर’ के डायरेक्टर शेखर महाजन ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि आस-पास के राज्यों से बच्चे लाए जाते हैं, जिनसे इन फैक्टरियों में बहुत कम मजदूरी पर काम कराया जाता है। आज जो बच्चे फैक्टरियों के चंगुल से आजाद कराए गए हैं, ये लम्बे समय से यहां काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इन बच्चों से फैक्टरी मालिक 12 घंटे से ज्यादा काम लेता था। बदले में इन्हें केवल 100-150 रुपये दिहाड़ी दी जाती थी। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि सभी को बाल शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। बाल शोषण करने वालों को सज़ा दिलवाएं, तभी भारत बाल मज़दूरी मुक्त बनेगा।
सहयोग केयर के निदेशक शेखर महाजन ने लेबर डिपार्टमेंट और एसडीएम से छुड़ाए गए बच्चों के लिए वेतन और मुआवजे की मांग करने के साथ-साथ फैक्टरियों को सील कर आरोपितों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि अभी भी सैकड़ों बाल बंधुआ मजदूर इन कारखानों में कैद हैं। महाजन ने प्रशासन से सवाल भी किया- आखिर कब तक होगी इनकी मुक्ति और कब तक होगा इनका पुनर्वास?


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