भारत रत्न की घोषणा पर भावुक हुए लालकृष्ण आडवाणी

जितेन्द्र बच्चन
नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की घोषणा से पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी शनिवार को भावुक हो गए। उन्होंने कहा – ‘जीवन अपना नहीं, देश का है।’ साथ ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी को सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान ‘भारत रत्‍न’ से सम्‍मानित करने का ऐलान किया है। यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा और खेल के क्षेत्र में देश के लिए असाधारण योगदान देने वाले लोगों को प्रदान किया जाता है।
लालकृष्‍ण आडवाणी पांच बार लोकसभा और चार बार राज्‍यसभा से सांसद रहे हैं। तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष रहे। इसके अलावा 2002 से 2004 तक वह देश के उप प्रधानमंत्री रहे। शनिवार को भाजपा के वयोवृद्ध नेता ने वक्तव्य जारी कर कहा कि 14 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता बनने के बाद से उन्होंने देश सेवा और उन्हें दिए कार्य को समर्पण को पारितोषिक माना है। वे ‘इदं न मम’ से प्रेरित होकर यह मानते रहे हैं कि यह जीवन अपना नहीं बल्कि देश का है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री आडवाणी को सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान ‘भारत रत्‍न’ दिये जाने पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा है, “मुझे यह बताते हुए बेहद हर्ष हो रहा है कि श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मैंने उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दी। हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक, भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उप प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है। उन्होंने हमारे गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनके संसदीय हस्तक्षेप हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं।”

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