लोकसभा चुनाव 2024: यूपी की सुल्तानपुर सीट फिर बचा पाएगी बीजेपी?

सुधांशु श्रीवास्तव
सुल्तानपुर। गोमती किनारे बसे सुल्तानपुर की सल्तनत पर लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है, लेकिन रायबरेली और अमेठी की तरह कभी इसे बहुत अधिक अहमियत नहीं मिली। इस सीट पर कांग्रेस से लेकर जनता दल, बीजेपी और बसपा जीत का परचम लहराने में कामयाब रही हैं। समाजवादी पार्टी इस सीट पर कभी अपना हक नहीं जता सकी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी मेनका गांधी को बसपा प्रत्याशी चंद्रभद्र सिंह सोनू से कड़ी टक्कर मिली थी और इस समय यहां से मौजूदा सांसद बीजेपी की मेनका गांधी ही हैं।
14 हजार से अधिक मतों से जीती थीं मेनका गांधी:
आगामी लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें इस सीट पर टिकी हैं। हालांकि, अभी इस सीट से किसी भी दल ने अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है। वर्तमान में इसी सीट से बीजेपी की मेनका गांधी सांसद हैं। इससे पहले उनके पुत्र वरुण गांधी यहां से सांसद थे। 2024 के चुनाव में भी बीजेपी इस सीट को हर हाल में अपने पाले में रखना चाहती है। अगर 2019 के नतीजों की बात करें तो यहां से भाजपा की मेनका गांधी को 459196 वोट मिले थे और मतदान का प्रतिशत 45.88 था। जबकि बसपा के चंद्रभद्र सिंह सोनू को 444670 वोट और 44.43 प्रतिशित व कांग्रेस के संजय सिंह को 41681 वोट और मतदान प्रतिशत 4.16 रहा।
इस बार किसे मिलेगी सफलता:
लोकसभा चुनाव 2014 की बात करें तो इस सीट से मेनका गांधी के पुत्र और बीजेपी प्रत्याशी वरुण गांधी ने कब्जा जमाया था। कुल मिलाकर सुल्तानपुर में कांग्रेस 8 और बीजेपी 5 बार चुनाव जीत चुकी है। साथ ही अब तक लोकसभा सीट सुल्तानपुर के लिए 17 चुनाव हो चुके हैं, जिसमें से सबसे अधिक सत्ता कांग्रेस के हाथ में रही। कांग्रेस ने आठ बार इस सीट पर जीत दर्ज की। जबकि बीजेपी को पांच बार सफलता मिली। सपा का अब तक यहां से खाता नहीं खुला है, लेकिन बसपा दो बार जीती है। जनता दल एक बार, जनता पार्टी एक बार और निर्दलीय एक बार अपनी जीत दर्ज करा चुके हैं।
कांग्रेस का भी रहा कब्जा:
सुल्तानपुर सीट पर 1977 में कांग्रेस को पहली हार का मुंह देखना पड़ा, जब जनता पार्टी के ज़ुलफिकुंरुल्ला कांग्रेस को हराकर सांसद बने। हालांकि, इस सीट पर 1980 में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और 1984 में दोबारा जीत मिली। लेकिन इसके बाद कांग्रेस को इस सीट पर जीत के लिए कई साल इंतजार करना पड़ा। अंत में 2009 में कांग्रेस के संजय सिंह ने जीत का सूखा खत्म किया।
वरुण गांधी भी यहां से सांसद रहे:
1989 में जनता दल से राम सिंह सांसद बने। 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान बीजेपी इस सीट पर कमल खिलाने में कामयाब रही। 1991 से लेकर 2014 के बीच बीजेपी ने चार बार जीत हासिल की है। 1991 और 1996 में विश्ननाथ शास्त्री जीते, 1998 में देवेन्द्र बहादुर और 2014 में वरुण गांधी। वहीं, बसपा इस सीट पर दो बार जीत हासिल की है, लेकिन दोनों बार सांसद अलग रहे हैं। पहली बार 1999 में जय भद्र सिंह और 2004 में मोहम्मद ताहिर खान बसपा से सांसद चुने गए थे।
सामाजिक ताना-बाना और चुनावी समीकरण:
जिले की आबादी की बात करें तो यहां 80 प्रतिशत हिंदू और 20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर 2011 के जनगणना के मुताबिक कुल जनसंख्या 2352034 है। इसमें 93.75 फीसदी ग्रामीण औैर 6.25 शहरी आबादी है। अनुसूचित जाति की आबादी इस सीट पर 21.29 फीसदी हैं और अनुसूचित जनजाति की आबादी .02 फीसदी है। इसके अलावा मुस्लिम, ठाकुर और ब्राह्मण मततादाओं के अलावा ओबीसी की बड़ी आबादी इस क्षेत्र में हार-जीत तय करने में अहम भूमिका रही है। देखना है इस समीकरण को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा किसे पार्टी उम्मीदवार बनाती है और उसे जीत हासिल होती है या नहीं?

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