राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मुरादनगर (गाजियाबाद)। “आध्यत्मिक गुरु ही भगवान का पता, भगवान का मार्ग बताते हैं। यहां तक कबीर दास ने भी कहा है कि हरि के रूठने पर आदमी का उद्धार हो सकता है परंतु गुरु के रूठने पर आदमी का उद्धार नहीं हो सकता है। इसलिये हमारे शास्त्रों व ज्ञानियों ने गुरु की महिमा गाई है।” यह कहना है सुविख्यात समाजसेवी श्री सतपाल महाराज का।
शनिवार को गंग नहर स्थित श्री हंस इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रांगण में मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में गुरु पूजा के पावन पर्व पर दो दिवसीय विशाल सत्संग समारोह के प्रथम दिवस पर उपस्थित भक्त समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे ब्रह्मा जी सृष्टि बनाते हैं, ऐसे ही गुरु महाराज ज्ञान में जन्म देते हैं तो ज्ञानी बनाते हैं, दूसरा जन्म देते हैं। विष्णु की तरह पालन करते हैं और शिव की तरह शंकाओं का संहार करते हैं। तो गुरु महाराज त्रिदेव का काम करते हैं। गुरु के बिना परमात्मा का अनुभव संभव नहीं है। इसलिए गुरु को प्रणाम किया गया और गुरु की पूजा का विधान हमारे शास्त्रों में है।
श्री महाराज जी ने कहा आज कितने प्रकार के प्रयोग हो रहे हैं, कितनी बीमारियों के बारे में जानकारियां प्राप्त हो रही हैं, आधुनिक प्रयोगशाला में प्रायोगिक प्रकरण जारी हैं पर आदमी को सुख प्राप्त नहीं हुआ। आज भी आदमी शांत नहीं है। दुनिया में सद्भावना हो, समाज में, देश में शांति हो,सद्भावना हो उसके लिए हमें अध्यात्म ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना होगा। अध्यात्म ज्ञान से मानव के ह्रदय में सद्भावना होगी तो समाज में, देश में, विश्व में भी सद्भावना होगी।
कार्यक्रम से पूर्व श्री महाराज जी, पूज्य माता श्री अमृता जी व अन्य विभूतियों का माल्यापर्ण कर स्वागत किया गया। सत्संग में अनेक संत-महत्माओं व विद्वानों ने अपने विचार रखे। मंच संचालन महात्मा हरिसंतोषानंद जी ने किया।


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