सरदार पटेल ने की थी देश की 564 रियासतों को एकता के सूत्र में बांधकर अखंड भारत की रचना

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की गुरुवार को पूरे देश में 144वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर शम्भू दयाल कालेज गाजियाबाद के सेमिनार कक्ष में भी सुबह 11 बजे सरदार पटेल जयंती का बड़ी धूमधाम से आयोजन किया गया। सांस्कृतिक समिति एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. मंजू गोयल ने मां शारदा के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया।
तत्पश्चात 12 विद्यार्थियों ने सरदार पटेल के जीवन से सम्बंधित अनेक प्रेरक प्रसंग, देश की अखंडता में उनके योगदान को लेकर बहुत सारे प्रसंग सुनाए। विशेषकर हैदराबाद, जूनागढ़ एवं कश्मीर रियासतों के भारत विलय में उनके योगदान को लेकर खूब चर्चा हुई और सरदार पटेल की प्रशंसा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्ष समाजशास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश भारद्वाज ने लौह पुरुष पटेल के जीवन के विविध पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए सभी विद्यार्थियों को अपने आशीर्वचन दिए। उन्होंने कहा, भारत के भू राजनीतिक एकीकरण के सूत्रधार ‘लौहपुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की आज 144वीं जयंती है। भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल का जन्म 1875 में आज ही गुजरात के नाडियाड में हुआ था। वह भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे। आज उनकी जयंती पर उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध उद्धरण को याद करना बेहद ही जरूरी है। सरदार पटेल के विचार आज भी हम लोगों को प्रेरणा देते हैं। उन्होंने देश की 564 रियासतों को एकता के सूत्र में बांधकर अंखड भारत की रचना की थी। भारत को एक राष्ट्र बनाने में उनकी खास भूमिका रही।
एमए हिन्दी की विद्यार्थी लता ने एक कविता के माध्यम से पटेल पर अपने विचार व्यक्त किए तो निशा सैफी ने (एमए अंग्रेजी) एक गीत के माध्यम से सरदार पटेल को शत-शत नमन किया। कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक समिति की संयोजक डॉ. बिंदु कर्णवाल ने किया। सुश्री प्रियंका गंगवार एवं एनएसएस की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीलम गर्ग की कार्यक्रम की सफलता में सराहनीय भूमिका रही। राष्ट्रगान के उपरांत कार्यक्रम की विधिवत समाप्ति की घोषणा की गई।

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