हरियाणा में ‘कमल’, जम्मू-कश्मीर में ‘कमाल’

जितेन्द्र बच्चन

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024 को आ गए। सारे एग्जिट पोल फेल हो गए! अनुमान से अप्रत्याशित नतीजे आए हैं! बीजेपी ने हरियाणा में 48 सीटें जीतकर हैट्रिक लगाई तो जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फे्रंस और कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर कमाल कर दिया है। केंद्र शासित प्रदेश में 10 साल बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को महज छह सीटें तो नेशनल कॉन्फे्रंस को अपार सफलता (42 सीटें) मिली है। लेकिन हरियाणा में भाजपा ने इतिहास रच दिया। ‘मन की बात’ करने वाले नरेन्द्र मोदी एक बार फिर ‘मनहर’ साबित हुए हैं! उनका यह सुनहरा दौर माना जाएगा और सीधे शब्दों में कहें तो हरियाणा में कांग्रेस और बाकी की सभी पार्टियां भाजपा से गच्चा खा चुकी हैं।
अब तो उन लोगों को भी यह बात मान लेनी चाहिए जो कल तक मोदी को महज जुमलेबाज कहते रहे हैं। मदद-इमदाद के नाम पर जरूरतमंदों को जो कुछ भी सरकार मुहैया करा रही है, उसका असर पूरी तरह पड़ता है। लोगों को भ्रष्टाचार, जमाखोरी और मिलावट के बीच मोदी एक उम्मीद की किरण नजर आते हैं। उनको लगता है कि आज नहीं तो कल शिक्षा और स्वस्थ्य में भी जरूर सुधार होगा। जाति, धर्म और मजहब के नाम पर बांटने-काटने की राजनीति करने वालों को मुंह की खानी पड़ेगी। यह सब किसी भी तरह से आम लोगों की सेहत के लिए ठीक नहीं है और यही कारण है कि हरियाणा की जनता ने भाजपा को एक बार फिर सत्ता सौंप दी है।
नतीजों के निहितार्थ दो मायने निकलते हैं। पहला- नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए ‘नायाब’ साबित हुए हैं और दूसरा भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है। हरियाणा में 10 साल के भाजपा शासन काल में सराकरअन्याय व अत्याचार पर थोड़ा-बहुत अंकुश लगाने में कामयाब रही है, जिससे आम जनता में विश्वास की भावना मजबूत हुई है। किसानों और मेहनतकश लोग जानते हैं कि डबल इंजन की सरकार ही उनके लिए फायदेमंद है। आज नहीं तो कल अच्छे दिन आएंगे। बच्चों और महिलाओं का जोखिम कम हुआ है। घर-घूंघट से बाहर निकलकर बहन-बेटियां आसमान छूने का सपना देखने लगी हैं। मध्यम वर्ग महंगाई की मार से जरूर पिस रहा है लेकिन उनके लिए भी सरकार अब 65 रुपये किलो टमाटर बेच रही है और बता रही है कि वह महंगाई (बाजार में 100 रुपये से भी अधिक) पर कंट्रोल कर रही है। कुपोषण हो या प्रदूषण, कम करने की कोशिश जारी है।
जो दिखता है वह बिकता है! मोदी जी जो बोलते हैं, उससे कई बार लोग सोचते हैं कि कहीं यह वोट बैंक के लिए भ्रमित तो नहीं किया जा रहा है। आजकल गरीबी दूर करने पर सरकार लगातार जोर दे रही है। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए, पहले थाली से दाल गायब हुई और अब सब्जी नहीं मिल रही है। कल तक जो गरीब प्याज-रोटी और हरी मिर्च-नमक खा लेता था, वही प्याज आज उसे अब एक बार फिर रुलाने लगा है। लेकिन मोदी सरकार के वित्त मंत्री आंकड़े पेश कर कहते हैं कि गरीबी दूर हो रही है। गरीबों की हालत में सुधार आने लगा है। मेहनत-मजदूरी करने वालों की आय का जरिया बढ़ रहा है। जीडीपी ग्रोथ पर है।
जीडीपी का अर्थ लोग भले ही पूरी तरह न समझते हों, लेकिन उनको इतना पता है कि मोदी जी के नेतृत्व में देश आर्थिक विकास कर रहा है। किसानों, दिव्यांगों, महिलाओं और वृद्धों के खाते में मामूली ही सही, सरकारी पैसा आ रहा है। गरीबी रेखा से नीचे गुजार-बसर कर रही महिलाओं को साल में दो बार मुफ्त में रसोई गैस सिलेंडर मिल रहा है। कई करोड़ लोगों को राशन की दूकान से पांच किलो मोटा अनाज प्राप्त हो रहा है। यही कारण है कि विपक्ष के लाख समझाने के बावजूद जनता भाजपा से मुंह नहीं मोड़ पा रही है। महंगाई में भी उसे भाजपा ही उम्मीद किरण नजर आती है।
अब रही बात जम्मू-कश्मीर की तो अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद वहां संपन्न हुए पहले विधानसभा चुनाव में जनता ने पीडीपी और अन्य छोटे दलों को नकार कर एक स्थिर व सशक्त सरकार के गठन की मंशा जाहिर की है। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है। सफल चुनाव के बाद अब जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार काम करेगी। उनके लिए अब प्रदेश को जहां पूर्ण राज्य और समग्र विकास की दिशा में आगे ले जाने का समय है, वहीं हरियाणा में भाजपा के शासन में पूरी तरह लोग महसूर कर चुके हैं कि मोदी का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसलिए अपना फैसला सुना दिया है। अब कांग्रेस इसे स्वीकार करे या ‘हार’ पर रार का बहाना ढूंढें, हमारा काम है सच का आईना दिखाना।
(लेखक सामाजिक चिंतक व वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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