राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मुजफ्फरपुर। महावाणी स्मरण द्वारा निराला निकेतन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अंजनी कुमार पाठक ने शास्त्री जी के गीतों को गाकर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। उनके अलावा कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ कवि, शायर एंव साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। आलोक कुमार अभिषेक ने “जात-पंथ के भेदभाव में गुम हुए…” पढ़कर आज के सामाजिकता पर करारा प्रहार किया।
रामवृक्ष राम चकपुरी ने ‘राजनीतिज्ञों की राजनीति बनी-बनाई जागीरें, जहाँ से खत्म हो जाएगा…’ सुनाया। आलोक शर्मा ने बेटियों के लिए भी सर उठाया करो… सुनाकर भावविह्वल कर दिया। नरेन्द्र मिश्र ने मन करता है कुछ गाने का, खाली घर की निरवता में सुनाया। अंजनी कुमार पाठक ने जब तक जीवन नेकी है करना सुनाया। रघुनाथ मोहब्बतपुरिया ने छएला मरदवा दुआर शोभेला गा कर सबको झूमा दिया। अरुण कुमार तुलसी ने रावण बनना कहाँ आसान था सुनाया।
सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने गोकुल तजि श्याम कहाँ जात बानी सुनाया। डा. उषा किरण श्रीवास्तव ने हे माँ वीणा वादिनी वर दो सुनाकर माँ सरस्वती के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की। डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने बेटी है घर का सम्मान सुनाई। उमेश राज ने यादों का क़फ़न ओढ़कर सो जायेंगे सुनाया। साहित्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने किया। मंच संचालन डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह और धन्यवाद ज्ञापन उमेश राज ने किया।


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