नव सम्वतसर पर फागुनी कविता सम्मेलन में कवियों ने बिखेरे रंग

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। राज नगर एक्सटेंशन स्थित सिग्नेचर होम्स सोसाइटी क्लब में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, महानगर इकाई द्वारा नव सम्वतसर पर आयोजित फागुनी कविता सम्मेलन में दो दर्जन कवियों ने अपनी श्रेष्ठ बहुमुखी कविताओं के जीवन के अनेक रंग बिखेरे। कविताओं में अंतश्चेतना जगाने की बातें हुईं तो समाज के विभिन्न पहलुओं पर भी कविताओं की रसधार जमकर बरसी।
कार्यक्रम का शुभारंभ सम्मेलन के अध्यक्ष सुविख्यात कवयित्री डॉक्टर रमा सिंह, मुख्य अतिथि मशहूर शायर मासूम गाजियाबादी, विशिष्ट अतिथि मशहूर शायर अनिमेष शर्मा ‘आतिश’, नगीना बिजनौर से आये सुपरिचित कवि अनिल नगीना, संस्था के मुख्य संरक्षक सुप्रसिद्ध कहानीकार-उपन्यासकार रवीन्द्र कांत त्यागी, संरक्षक कवि राधेश्याम ‘मधुकर’ और मेरठ प्रांत के महासचिव डाक्टर चेतन आनंद ने मां शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कवयित्री पूजा श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना “मां दुख सभी हरना“ प्रस्तुत की।
कवयित्री संगीता वर्मा, दीपिका वाल्दिया, सीमा सागर शर्मा, शोभा सचान, कवि गोपाल गुंजन, कवयित्री सरिता गर्ग ‘सरि’, कवि राधेश्याम ‘मधुकर’, संस्था के सचिव कवि अजीत श्रीवास्तव, कवयित्री पूजा श्रीवास्तव, कवि डाक्टर राजीव श्रीवास्तव, प्रसिद्ध कवयित्री ममता लड़ीवाल, कवि मनोज कामदेव, मृत्युंजय साधक और अनिल नगीना ने अपने-अपने गीत-गजलों से सभी का दिल जीत लिया।
कार्यकम के विशिष्ट अतिथि मशहूर शायर अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ ने “आदमी बनकर हमारे साथ चल कर देखिए…” ग़ज़ल से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मशहूर शायर मासूम गाजियाबादी ने एक से बढ़कर एक शेर पेश किये। उनकी मशहूर ग़ज़ल “यूं भी बचाई हमने गरीबी की आबरू…” को श्रोताओं का खूब प्यार मिला। प्रसिद्ध कवि डॉक्टर चेतन आनंद ने अपनी सुप्रसिद्ध रचना “दुख का पिंजरा खोलो मन के पंछी को आजाद करो, अंधियारे से बाहर निकलो, सूरज से संवाद करो…” सुना़कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
संस्था के मुख्य संरक्षक जाने-माने उपन्यासकार रवीन्द्र कांत त्यागी ने सभी की प्रशंसा करते हुए गोष्ठी को बेहद सफल बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही कवयित्री डॉक्टर रमा सिंह ने कई शानदार गीत प्रस्तुत किये। मंच का सफल संचालन कवयित्री गरिमा आर्या ने किया। उनके द्वारा प्रस्तुत माहियों ने सभी श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

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