राष्ट्रीय जनमोर्चा, छपरा कार्यालय।
नगर के प्रखर बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार प्रो. एच.के वर्मा के निधन के समाचार से जय प्रकाश विश्वविद्यालय का शिक्षक समुदाय मर्माहत है। नगर के सार्वजनिक जीवन में प्रो. वर्मा के योगदान को याद करते हुए विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय के शिक्षकों ने एक शोक-सभा का आयोजन किया। जिसका संचालन करते हुए हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार ने प्रो. वर्मा के साथ नगर के जगदम कॉलेज में बिताये अपने दिनों की याद करते हुए कहा कि प्रोफेसर साहब स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा के संवैधानिक आदर्श के मूर्तिमान रूप थे।
हिन्दी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चन्दन श्रीवास्तव ने प्रो. वर्मा के बहुमुखी व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि प्रोफेसर साहब भारत का नव-निर्माण करने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल हस्ताक्षर थे। एक ऐसे समय में जब सार्वजनिक बहसों और लोक-कल्याण के मसलों को विविध मतवादों में उलझाकर धुंधला किया जा रहा है और सार्वजनिक संस्थाएं अपनी गरिमा खो रही हैं, तब प्रो. वर्मा का न होना विशेष रूप से पीड़ादायी है। क्योंकि उन्होंने जीवित रहते अपनी अदम्य ऊर्जा से नागरिक जीवन को शुचिता, पारदर्शिता और सच्चाई की हमेशा राह दिखायी।
संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर वैद्यनाथ मिश्र ने प्रो. वर्मा के भाषा-प्रेम की याद दिलाते हुए कहा कि अंग्रेजी अखबार के विशेष संवाददाता होने के बावजूद वह भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिन्दी और संस्कृत से विशेष लगाव रखते थे और उन्होंने कई अवसरों पर अपने भाषा-प्रेम के अनुपम उदाहरण पेश किये।
शोक सभा में मौजूद उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. मजहर किबरिया ने कहा कि मनुष्य की देह मिट्टी की है लेकिन समय की शिला पर मनुष्य अपने कर्मों से जो लिखाई करता है, उसके अमिट होने की संभावना रहती है। प्रो. वर्मा ने अपने कर्मों से ऐसी ही अनुकरणीय और अमिट तस्वीर बनायी है। साथ ही कई अन्य विद्वानों ने भी अपने-अपने विचार रखे। जिनमें प्रमुख हैं प्रो. रामनाथ प्रसाद, प्रो. हरिश्चंद, प्रो. विश्वामित्र पाण्डेय, प्रो शमी अहमद, प्रोफेसर सुशील कुमार श्रीवास्तव, डॉ अजीत नारायण, डॉ अविनाश भारती, दीपशिखा आदि।
शोक-सभा में प्रो. वर्मा के कई पूर्व-छात्र और शोधार्थी भी मौजूद थे। बाद में डॉ. विद्या भूषण श्रीवास्तव ने अपनी श्रद्धांजलि निवेदित करते हुए सभी का धन्यवाद किया।


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