राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
जयपुर। रविंद्र रंग मंच के समीप स्थित रामनिवास पार्क में देश के विभिन्न भागों से आए हजारों की संख्या में स्वर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी काला कानून के विरोध में महापंचायत की। उसके बाद आक्रोश प्रदर्शन किया गया। महापंचायत का नेतृत्व करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने किया। उन्होंने विरोध प्रदर्शन करने वाले राजपूत, ब्राह्मण, कायस्थ और वैश्य समाज के लोगों के साथ यूजीसी को “काला कानून” बताते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के अधिकारों का हनन करते हैं, इनका दुरुपयोग हो सकता है और ये सवर्ण छात्रों/शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाने का जरिया बन सकते हैं। अगर इस कानून को वापस नहीं लिया गया तो जल्द ही देश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
आक्रोश जताते हुए विरोध प्रदर्शन करने वालों में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, कायस्थ जनरल सभा और श्री चित्रगुप्त सेना के समाज बंधुओ ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कायस्थ जनरल सभा के महासचिव अनिल माथुर ने कहा कि यह कानून हिंदू समाज को बांटने और युवाओं में आपसी द्वेष, घृणा व समाज में वैमनस्य बढ़ाने वाला है। यह कानून देश की एकता अखंडता को तोड़ने वाला काला कानून है। इससे विश्वविद्यालय में सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ लड़कियों को भी दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ेगा और उनका जीना मुश्किल हो जाएगा
विरोध प्रदर्शन से पहले करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और मठाधीश्वर आनंद स्वरूप के अलावा अन्य कई वक्ताओं ने भी संबोधित किया। उन्होंने सवर्ण समाज को एकजुट होकर इस काले कानून के विरोध में उठ खड़े होने का आव्हान किया है। उपस्थित लोगों ने विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ किया। उसके बाद अपने मोबाइल की लाइट जलाकर सांकेतिक मशाल जैसा विरोध व्यक्त किया। मंच से सभी वक्ताओं ने इस कानून को वापस लेने की मांग की है।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय सचिव जनार्दन माथुर ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि बुधवार की महापंचायत में सरकार को चेतावनी देते हुए तय किया गया है कि अगर सरकार ने यूजीसी का काला कानून वापस नहीं लिया तो जल्द ही बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा और विरोध में जनप्रतिनिधियों का घेराव भी किया जाएगा।


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