प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया कोसी रेल महासेतु का तोहफा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज बिहार को रेलवे की आधरभूत संरचना में सुधार की बड़ी सौगात दी। उन्होंने शुक्रवार को कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन किया। इस ब्रिज के चालू होने के साथ करीब नौ दशक बाद कोसी व मिथिलांचल आपस में रेल मार्ग से जुड़ेंगे। नेपाल सीमा के पास स्थित इस महासेतु का रणनीतिक महत्व भी है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान इसके निर्माण में प्रवासी मजदूरों ने भी अपना योगदान दिया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने रेलवे से संबंधित 12 अन्‍य परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।
बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा के पहले यह प्रधानमंत्री का चौथा उद्घाटन व शिलान्यास कार्यक्रम है। इस वर्चुअल कार्यक्रम में दिल्ली से प्रधानमंत्री के साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल भी जुड़े। कार्यक्रम में पटना से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी शिरकत की।
प्रधानमंत्री के आज के कार्यक्रम में कोसी नदी पर मेगा ब्रिज का उद्घाटन सबसे अहम होगा। इसके माध्‍यम से कोसी और मिथिलांचल एक-दूसरे से रेलवे के नेटवर्क के माध्‍यम से जुड़ेंगे। मेगा ब्रिज पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होते ही निर्मली से सरायगढ़ की दूरी घटकर केवल 22 किलोमीटर रह जाएगी। कोसी क्षेत्र में निर्मली और भापटियाही के बीच कभी मीटर गेज रेल ट्रैक था, लेकिन 1934 में बाढ़ व भूकंप में यह तबाह हो गया था। उसके बाद कोसी नदी के अभिशाप के कारण यहां रेल मार्ग के पुनर्निर्माण का काम लंबे समय तक शुरू नहीं किया गया। करीब 516 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित करीब दो किलोमीटर लंबे इस मेगा ब्रिज का शिलान्‍यास तत्‍कालीन प्रधानमंत्री भारतरत्‍न अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। केंद्र सरकार ने इसे 2003-04 में हरी झंडी दी और जून, 2003 में इसका निर्माण शुरू हो गया था। वहीं अब निर्मली से सरायगढ़ जाने के लिए दरभंगा-समस्तीपुर-खगडि़या-मानसी-सहरसा होते हुए 298 किमी की दूरी तय करने की मजबूरी समाप्‍त हो जाएगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि इस रेल मेगा ब्रिज के उद्घाटन के साथ क्षेत्र के लोगों की लंबी प्रतीक्षा का अंत हो गया। साथ ही 86 साल पुराना उनका सपना भी साकार हो गया। प्रधानमंत्री ने इसके अलावा 12 अन्‍य रेल परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। इनमें किउल नदी पर एक रेल ब्रिज, दो नई रेल लाइनें, पांच विद्युतीकरण से संबंधित परियोजनांए, एक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शेड और बाढ़ व बख्तियारपुर में तीसरी रेल लाइन परियोजना भी शामिल हैं।

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