नई दिल्ली। फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के पाली हिल स्थित दफ्तर को तोड़े जाने संबंधित मामले पर आज शुक्रवार को हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने बीएमसी को जमकर फटकार लगाई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कंगना के दफ्तर में हुए नुकसान का मूल्यांकन किया जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा है कि कंगना द्वारा तोडफ़ोड़ में हुए नुकसान के बयान का वह समर्थन नहीं करता है। जहां तक कंगना द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयानों और पोस्ट का सवाल है तो कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोच-समझकर बोलना चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा कि विषय दफ्तर को तोड़ा जाना है न कि ट्वीट में कही गई बातें। वहां पर बहुत सा काम रुका पड़ा है। कोर्ट ने कहा कि वह कंगना द्वारा दिए गए बयान हालांकि गैरजिम्मेदाराना हैं लेकिन बेहतर तरीका यही है कि ऐसे बयानों को नजरअंदाज किया जाए। कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति विशेष कुछ भी मूर्खतापूर्ण बात कहे। राज्य द्वारा समाज पर बाहुबल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने तस्वीरों और अन्य सामग्रियों का विश्लेषण किया, जिनमें संजय राउत धमकी दे रहे हैं। सामना में छपी सामग्री और न्यूज चैनल पर चलाई गईं वीडियो क्लिप। इमारत को 40 प्रतिशत तक तोड़ा जाना और सामना द्वारा छापी गई हेडलाइन ‘उखाड़ दिया’ पर गौर किया।
कोर्ट ने बीएमसी को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने माना कि ये सभी चीजें कंगना को धमकाने के मकसद से की गईं और बीएमसी की मंशा ठीक नहीं थी। दिया गया नोटिस और की गई तोडफ़ोड़ असल में कंगना को धमकाने के लिए थी। कोर्ट ने कहा कि कंगना को हर्जाना दिए जाने के लिए दफ्तर में हुई तोडफ़ोड़ का मूल्यांकन किया जाए और इस मूल्यांकन की जानकारी कंगना और बीएमसी दोनों को होनी चाहिए। जो भी हर्जाना होगा वह बीएमसी द्वारा भरा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कंगना बीएमसी से दफ्तर को दोबारा बनाने के लिए आवेदन करेंगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह बीएमसी को इस बात का भी आवेदन दे सकती हैं कि दफ्तर के जो हिस्से टूटे नहीं हैं, उन्हें दोबारा से सुव्यवस्थित किया जाए।


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