राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी आयोजित
गाजियाबाद। अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में आरडीसी, राज नगर में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कई कवियों, कवित्रियों, गीतकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर समां बांध दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार डॉ धनंजय सिंह और संचालन युवा कवि प्रवीण कुमार ने किया। काव्य गोष्ठी की शुरुआत डॉ रमेश कुमार भदौरिया द्वारा सरस्वती वंदना से की गई। इसके पश्चात वरिष्ठ ग़ज़लकार गोविंद गुलशन ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा- “इतना रंगीन तेरे इश्क में आंचल हो जाए, सिर्फ दीवाना नहीं दिल मेरा पागल हो जाए…।
रविवार, 7 फरवरी को आयोजित गोष्ठी में कवित्री डॉक्टर तारा गुप्ता ने अपनी रचना कुछ यूं पढ़ी- इधर जाएं या उधर जाएं, तुम ही बोलो किधर जाएं…। कवि सुरेंद्र शर्मा ने अपना कलाम यूं पढ़ा- “जहां हो झूठ की सत्ता, वहां सच कौन बोलेगा, चरम महंगाई में चीजें, सही से कौन तोलेगा।” डॉ महेंद्र कुमार बेनीवाल ने “भूखा पेट” शीर्षक से अपनी कविता पढ़ी। सुदामा पाल ने ग़ज़ल कुछ यूं कही- “तुम्हारे जाने से बहुत तन्हा हुआ हूं, जहां छोड़ा था तुमने, वही ठहरा हुआ हूं। ये आंधियां अब क्या डराएगी मुझको, मैं हर एक तूफ़ां से गुजरा हुआ हूं।”
पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी व ग़ज़लकार वीके शेखर ने छोटी बहर की ग़ज़ल प्रस्तुत करते हुए कहा- “कुछ तो खास खजाने रख, सत्तर-अस्सी के गाने रख। तर्क अगर बर्दाश्त न हो, किस्से और फ़साने रख।” कवियत्री तरुणा मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति देते हुए पढ़ा- “जब आंखों से नाम पुकारा जाएगा, सबसे पहले नाम हमारा आएगा।”
युवा कवि प्रवीण कुमार ने अपनी कविता पाठ करते हुए जीवन की सच्चाई बयां की- “कुदरत है सबसे श्रेष्ठ रचनाकार, रचा उसने वैविध्य पूर्ण संसार।” वहीं रमेश कुमार भदौरिया ने फिल्मी गीतों को सुनाकर खूब तालियां बटोरी।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ गीतकार धनंजय सिंह ने खूबसूरत गीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया- “गीत गाने का मन ही न हो, फिर गीत गाने से क्या फायदा। ज़िन्दगी के किसी घाट पर, संत हो भी गये हम तो क्या, डूबने हमको लहरें न दें, पार जाने से क्या फायदा।” वरिष्ठ छायाकार कुलदीप स्वास्थ्य कारणों से अपना कविता पाठ नहीं कर सके। वहीं इस अवसर पर आज वरिष्ठ ग़ज़लकार गोविंद गुलशन का जन्मदिन होने पर सभी रचनाकारों ने उन्हें संयुक्त रूप से बधाई दी।
अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के महासचिव प्रवीण कुमार ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि अमर भारती की ओर से हर माह के पहले रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाता रहा है लेकिन कोरोना काल के चलते आज करीब 11 माह बाद फिर काव्य गोष्ठी का आयोजन शुरू हुआ है। कोशिश है कि यह अब पूर्व की भांति हर माह आयोजित की जाती रहेगी।


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