राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अजित सिंह का 82 वर्ष की उम्र में आज गुरुवार को निधन हो गया। वह कुछ दिन पहले कोरोना से संक्रमित हो गए थे और गुरुग्राम के आर्टिमिस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। कोरोना के कारण उनके फेफड़ों में संक्रमण बढ़ गया था, जिससे उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी और इसी के चलते उनका 6 मई के निधन हो गया।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे चौधरी अजित सिंह उत्तर प्रदेश के बागपत से सात बार सांसद रहे और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री भी रह चुके हैं। उनके निधन के बाद पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शोक की लहर है। अजित सिंह और उनके परिवार की जाट समाज में काफी पैठ रही है। पिछले दो लोकसभा चुनाव और दो विधानसभा चुनाव के दौरान रालोद का ग्राफ तेजी से गिरा। यही वजह है कि वे अपने गढ़ बागपत से भी लोकसभा चुनाव हार गए। हालांकि किसान आंदोलन के बाद से अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी एक बार फिर पश्चिमी यूपी में अपनी धाक जमाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।
किसानों के मसीहा थे चौधरी अजित सिह: अमित पंवार
उत्तर प्रदेश शोषित मोर्चा के गाजियाबाद जिलाध्यक्ष अमित पंवार ने चौधरी अजित सिंह को किसानों का मसीहा बताते हुए कहा कि जमीन से लेकर जनता तक खेत से लेकर सांसद तक सभी चौधरी साहब का सम्मान करते थे। चौधरी चरण सिंह की जब तबीयत खराब थी तब अजित सिंह अमेरिका में नौकरी कर रहे थे। राजनीति से कोसों दूर 1986 में वह पहली बार राज्यसभा के सांसद बने और 1989 में केबिनेट ने उन्हें उद्योग मन्त्री बनाया। वर्ष 1988 में लोकदल (अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। हर दल में उनका बड़ा सम्मान था। चौधरी अजित सिंह के जाने से आज किसान युग का एक अध्याय समाप्त हो गया।


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