जितेन्द्र बच्चन/राष्ट्रीय जनमोर्चा
गाजियाबाद। कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद भी मरीजों में पोस्ट कोरोना इफेक्ट सामने आ रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा घातक फंगस इन्फेक्शन है। इस घातक बीमारी का नाम ‘म्यूकर माइकोसिस’ है। गुजरात के बाद अब यूपी में भी इस बीमारी की दस्तक होने लगी है। लखनऊ और वाराणसी के बाद गाजियाबाद में भी कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीजों में ‘म्यूकर माइकोसिस’ के लक्षण मिले हैं। यहां राजनगर में आरडीसी स्थित हर्ष अस्पताल में काला फंगस होने का मामला सामने आया है।
हर्ष अस्पताल के मुख्य डॉ. बीपी त्यागी ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि यह मरीज पहले कोरोना संक्रमित था, जो इलाज से ठीक हो गया। बाद में उसकी आंख में परेशानी होने लगी। जांच के बाद उसकी आंख का ऑपरेशन किया गया। अब उसकी हालत ठीक है लेकिन काला फंगस के इस केस के सामने आने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि काला फंगस कोरोना इलाज के दौरान अधिक स्टेरायड लेने से होता है। यह अधिकतर शुगर व कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों को अपना शिकार बनाता है।
डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि ‘म्यूकर माइकोसिस’ का अगर बहुत अच्छा इलाज किया जाए, तब भी 100 में से पांच मरीज ही बच पाते हैं। अगर काला फंगस दिमाग तक पहुंच जाए तो 100 में से सिर्फ एक मरीज ही बच पाता है। उन्होंने इसके लक्षणों के बारे में बताया कि चेहरे पर सुन्नपन, एक तरफ या दोनों तरफ की नाक का बंद होना, आंखों में कालापन, सूजन, आंख की पुतली का न घूमना, सामने की वस्तु दो-दो दिखाई देना, तालू की लालिमा का खत्म होना, दांतों का हिलना, खाने में दिक्कत होना, सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी होना, बेहोशी छाना और सुस्ती महसूस होना शामिल है। इनमें से कुछ भी किसी को लगे तो उसे तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


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