पर्यावरण बचाने के लिए ‘मियावाकी’ तकनीक का कर रही प्रयोग

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्वामी दयानंद पार्क इंडस्ट्रियल एरिया कवि नगर में ‘समर्थ नारी समर्थ भारत’ की कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण को बचाने के लिए ‘मियावाकी’ तकनीक का एक बेहतरीन आयोजन किया। राष्ट्रीय महासचिव प्रिया वर्मा के नेतृत्व में राज सिरोही, पूनम माथुर, अंजलि और सविता ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। साथ ही लोगों को भी इस विधि के प्रति जागरूक किया।
प्रिया वर्मा ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि ‘मियावाकी’ तकनीक के अनुसार दुनिया को ठंडा रखने के लिए जंगल उगाना ही एकमात्र उपाय है। अगर जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचना है तो लोगों को कम से कम एक लाख करोड़ (एक ट्रिलियन) पेड़ लगाने होंगे। इसी सोच को आगे बढ़ाती है जापान से निकली जंगल उगाने की ‘मियावाकी’ तकनीक। उन्होंने बताया कि इसे जापान के बॉटेनिस्ट अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था। इसकी मदद से बहुत कम और बंजर जमीन में भी तीन तरह के पौधे (झाड़ीनुमा, मध्यम आकार और छांव देने वाले बड़े पेड़) लगाकर जंगल उगाया जा सकता है।
श्रीमती वर्मा का कहना है कि अर्बन फॉरेस्ट कैटेगरी की यह तकनीक इतनी आसान है कि आप बगीचे या आसपास की खुली जगह में भी मिनी मियावाकी जंगल उगा सकते हैं। दुनियाभर में इस तकनीक से अब तक तीन हजार से ज्यादा जंगल उगाए जा चुके हैं। पिछले दिनों तेलंगाना सरकार ने मियावाकी से 3.29 करोड़ पौधे लगाने की योजना बनाई थी। महाराष्ट्र और बेंगलुरू में कई स्थानों पर सफलतापूर्वक ऐसे जंगल उगाए जा चुके हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित एम्स में भी मियावाकी जंगल तैयार करने पर काम चल रहा है। इस अवसर पर हरजिंदर तोमर, क्षितिज और आलोक वर्मा ने भी पौधरोपण में भागीदारी निभाई।

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