- जितेन्द्र बच्चन
राजस्थान के उदयपुर में दो शैतानों ने बर्बरता की सारी हदें पार दीं। दिमाग सुन्न हो गया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। स्तब्ध हूं मैं। यह महज कन्हैया लाल की हत्या नहीं है बल्कि इंसानियत का कत्ल है। बेहद भयावह और वीभत्स! मज़हबी कट्टरता के खेत में जो ज़हर सियासत ने बोया, उसका रक्तरंजित आइना है यह। किसी भी सभ्य समाज में ऐसे नृशंस कृत्य की कोई जगह नहीं है।
उदयपुर के गोवर्धन विलास इलाके में रहने वाले पेशे से दर्जी 40 वर्षीय कन्हैया लाल का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की निलंबित नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में बयान दिया और उनका वह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पोस्ट को लेकर 11 जून को कन्हैया लाल के पड़ोसी नाजिम ने रिर्पोट दर्ज कराई थी। पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लिया लेकिन कोर्ट से कन्हैया लाल को जमानत मिल गई। इसके चार दिन बाद पुलिस ने 15 जून को नाजिम आदि और कन्हैया लाल के बीच समझौता करा दिया।
लेकिन सूत्र बताते हैं कि नाजिम के दिल में कन्हैँया को लेकर नफरत थी। वह लगातार साजिश रचता रहा। कन्हैया लाल ने पुलिस को इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने 11 जून को ही पुलिस को एक प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया था कि भूत महल के पास सुप्रीम टेलर्स के नाम से उनकी दुकान है। नाजिम और उसके कुछ साथी उसकी दुकान की रेकी कर रहे हैं। उन्हें जान से मारने की कोशिश की जा रही है। बताया तो यह भी गया है कि कन्हैया लाल ने पुलिस को इस बात की भी इत्तला दी थी कि नाजिम ने उसका फोटो सोशल मीडिया ग्रुप में वायरल कर दिया है। उसके साथ ही उसने लोगों से कहा है कि यह (कन्हैया लाल) शख्स अगर कहीं दिखे या दुकान पर आए तो इसे जान से मार देना।
कन्हैया लाल ने नाजिम और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी सुरक्षा भी मांगी थी। डर-भय की वजह से उन्होंने कुछ दिन दुकान भी बंद रखी लेकिन पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। कन्हैया लाल आखिर कब तक दुकान बंद रखते। रोजी-रोटी चलाने के लिए उन्होंने 28 जून, २०२२ को दुकान खोल दी। दुकान में दो मुस्लिम युवक कपड़ा सिलवाने के बहाने पहुंचे और कन्हैया लाल पर हमला कर दिया। दूसरा युवक इस पूरी घटना का बड़े फक्र के साथ वीडियो बनाता रहा। उसके बाद हंसते-मुस्कराते हुए उसे वायरल कर दिया और वारदात की पूरी जिम्मेदारी भी लेने का दावा ठोक दिया। इस वीडियो के सामने आते ही पूरे इलाके में हडक़ंप मच गया। हालात तनावपूर्ण हो गए। जिसने सुना वही सन्न रह गया।
पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को राजसमंद जिले के भीमा गांव से गिरफ्तार कर लिया है लेकिन बवाल कम होने का नाम नहीं ले रहा है। घटना के विरोध में कई हिन्दू संगठन भी सड़कों पर उतर आए हैं। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहें हैं। दुकानें बंद कराई जा रही हैं। आगजनी भी हुई है। पुलिस प्रशासन ने एहतियातन 24 घंटे के लिए जिले भर की इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलवाने की बात कर शान्ति बनाए रखने की अपील की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उदयपुर की इस घटना को बेहद भयावह और वीभत्स बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है।
केन्द्र सरकार ने भी घटना का संज्ञान लिया है। एनआईए की चार सदस्यीय टीम जांच के लिए उदयपुर भेजी गई है। टीम में सीनियर रैंक के अधिकारी मौजूद हैं। चूंकि इस मामले में जेहादी ग्रुप के सक्रिय होने का अनुमान है, इसलिए मामले की तह तक पहुंचना जरूरी है। धर्म के नाम पर बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अब क़ानून अपना काम करेगा। किसी भी तरह की इन अपराधियों को रियायत नहीं मिलनी चाहिए। साथ ही हमें यह बात भी समझनी होगी कि इन हैवानों के इस कृत्य से कुछेक समुदायों में घृणा पैदा हो सकती है, इसलिए संबंधित समुदायों के समझदार लोगों को यह सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए कि हैवानियत के इस आतंक से देश का कहीं माहौल न बिगड़े। साथ ही हमें यह भरोसा भी देना होगा कि हम हमारे देश को तालीबानी कल्चर पर नहीं आने देंगे चाहे इसके लिए हमारी जान ही क्यों न चली जाए। याद रखना कायरों, वक्त सब का हिसाब करेगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)


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