जितेन्द्र बच्चन/राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। रामपुर विधानसभा उपचुनाव जीतकर जहाँ उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने कुछ हद तक इज्जत बचा ली, वहीं कायस्थ समाज ने प्रदेश में सन्देश दिया कि वह पूरी ताकत के साथ भाजपा के साथ खड़ा है। आजादी के बाद रामपुर से हिंदुत्व की लहर बुद्धिजीवी समाज की जागरुकता का नतीजा है लेकिन जाट बहुबल सीट खतौली की हार ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे पर चिन्ता की लकीर छोड़ गई। दूसरी तरफ आगामी बरेली मुरादाबाद खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव जो कि फरवरी में होना है, कायस्थ समाज की दावेदारी को और पुख्ता कर रहा है। क्योंकि 9 जनपदों में बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूँ, मुरादाबाद, रामपुर, सम्भल, अमरोहा, बिजनौर में अधिकतर स्नातक कायस्थ मतदाताओं की संख्या अधिक है। और उन सभी ने इस बार पूरा मन बना लिया है कि मनोज सक्सेना के अलावा दूसरा कोई मंजूर नहीं है।
कायस्थ समाज करो-मरो की नीति पर:
उल्लेखनीय है कि आजादी के बाद जब भी स्नातक चुनाव हुए हैं कायस्थ समाज जो कि पढ़ा-लिखा समाज कहलाता है, उसे भाजपा ने कभी प्रत्याशी नहीं बनाया। इसके बावजूद पूर्व मंत्री स्वर्गीय नेपाल सिंह लोधी के चुनाव जीतने में कायस्थ समाज अपना पूर्ण योगदान देता रहा है। लोधी के निधन के बाद इस सीट पर शिक्षक से सेवानृवित्त जयपाल सिंह को लड़ाया गया। उनकी जीत में भी कायस्थ समाज का विशेष सहयोग रहा, लेकिन अब कायस्थ समाज करो-मरो की नीति के तहत इस चुनाव को लड़ना चाहता है। लोकप्रिय, तेज-तर्रार और युवा नेता मनोज सक्सेना को इस बार कायस्थ समाज इस सीट से जीतते हुए देख रहा है। वह उनकी दावेदारी का पूरा समर्थन कर रहा है।
कायस्थ समाज के मजबूत स्तंभ:
मनोज सक्सेना भारतीय जनता पार्टी से तालुक रखते हैं। कायस्थ समाज में उनकी अपनी खास पहचान है। लोकप्रिय हैं। कायस्थ समाज के राष्ट्रीय स्तर पर उनकी सक्रियता बराबर बनी रहती है, जिससे यह भी स्पष्ट है कि अब कायस्थ समाज एकजुट है। मनोज सक्सेना के अलावा इस सीट पर कायस्थों को और कोई भी कतई स्वीकार नहीं है। होनी भी नहीं चाहिए, आखिर वह कायस्थ समाज के एक मजबूत स्तंभ जो हैं। बूढ़े, जवान और महिलाएं हर कोई मनोज सक्सेना में अपना प्रतिनिधि देखता है। कायस्थ समाज जानता है कि अब तक जब वह भाजपा से किसी और को जिताता आ रहा था तो इस बार बरेली मुरादाबाद खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव उसके समाज का खुद एक युवा नेता क्यों नहीं प्रतिनिधित्व कर सकता है।
जयपाल सिंह में दम नहीं:
कायस्थों का इसके पीछे अपना मजबूत तर्क भी है। उनका कहना है कि वर्तमान विधान परिषद सदस्य जयपाल सिंह व्यस्त ज्यादा उम्र के हो चुके हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत अधिक भाग-दौड़ नहीं कर सकते। युवा वर्ग लगातार मांग कर रहा है कि शिक्षित सीट से किसी शिक्षित और तेज-तर्रार को ही प्रत्याशी बनाया जाए। पार्टी अगर चाहे तो जयपाल सिंह को संगठन में स्थान दे सकती है। इसके अलावा मनोज सक्सेना की अभी हाल ही में हुए रामपुर विधानसभा उपचुनाव में जो सक्रियता देखने को मिली और आकाश सक्सेना ने शानदार जीत दर्ज की, उसने भी युवाओं में एक नई चमक पैदा कर दी है।
अधिवक्ता कर रहे समर्थन:
आकाश सक्सेना की जीत ने जहां बरेली मुरादाबाद खण्ड स्नातक सीट से कायस्थ प्रत्याशी की मांग मजबूत कर दी है, वहीं मनोज सक्सेना का अधिवक्ता होना भी पार्टी को मजबूती प्रदान कर रहा है। नौ जिले के अधिवक्ता खुलकर मनोज सक्सेना के समर्थन में आ रहे हैं, जो पार्टी को मजबूती देने के लिए काफी है। भाजपा भी यह अच्छी तरह जानती है कि मिशन- 2024 (लोकसभा चुनाव) के लिए उसे हर वर्ग को साधना है। इसलिए अंदरखाने से पता चला है कि राजनीतिक हाशिये पर आए कायस्थ समाज को भागीदारी देने पर विचार करना शुरू कर दिया है। कायस्थ समाज का वोट भाजपा का मजबूत वोट कहलाता है। गोरखपुर-अयोध्या व लखनऊ-कानपुर में भी स्नातक चुनाव होने हैं। ऐसे में बरेली मुरादाबाद खण्ड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कायस्थ समाज की दावेदारी पूरी तरह पुख्ता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)


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