राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। नई दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम सभागार में अद्विक पब्लिकेशन एवं कियान फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विख्यात फिल्म गीतकार आनंद बख़्शी की 95वीं जयंती मनाई गई। ‘एक शाम आनंद बख़्शी के नाम’ यह शाम फिल्मों में आनंद बख़्शी के मधुर एवं यादगार गीतों के अद्वितीय योगदान को समर्पित थी। इस मौके पर आनंद बख़्शी पर आधारित लेखिका संगीता बिजीथ द्वारा लिखित दो संग्रहणीय पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
उल्लेखनीय है कि आनंद बख्शी के लिखे करीब 4000 गीत आज भी लोगों की जुबान पर बसे हुए हैं और हर गीत सुपरहिट रहा है। वहीं सोमवार, 21 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन के दौरान संगीता ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, “यह मेरे जीवन का एक अभूतपूर्व लम्हा है। यह मेरा पहला प्रयास है और मैं सभी गुणीजनों का हृदय से धन्यवाद करती हूं। मैं संगीत के लिए बनी हूं और बख़्शी साहब उसकी रूह हैं।”
मुख्य अतिथि राकेश आनंद बख्शी रहे :
कार्यक्रम में देशभर से आए जाने-माने साहित्यकारों, संगीत प्रेमियों और संस्कृति से जुड़े गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने इस शाम को और भी विशेष बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेई ने की। मुख्य अतिथि राकेश आनंद बख्शी (आनंद बख़्शी जी के सुपुत्र) थे तथा चर्चित व्यंग्यकार सुभाष चन्दर के सानिध्य में हुए इस कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि साहित्यकार, निर्माता- निर्देशक व अभिनेता रवि यादव, वन्दना यादव, हिन्दी अकादमी के उप सचिव ऋषि कुमार शर्मा, राम अवतार बैरवा, रमा सिंह, कार्टूनिस्ट हरविंदर मांकड़, शालिनी अगम, प्रदीप सरदाना, आयोजक अशोक गुप्ता व जोया खान उपस्थित रहे।
रचनात्मक सेवाओं के लिए किया सम्मानित :
लेखिका रिंकल शर्मा, वन्दना यादव और मीनू त्रिपाठी को उनकी सृजनशीलता एवं रचनात्मक सेवाओं के लिए 11 हजार की सम्मान राशि के साथ कियान साहित्य अमृत सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार शर्मा, साहित्यकार व फ़िल्म निर्माता-निर्देशक रवि यादव, ओम प्रकाश प्रजापति, स्वाति चौधरी, आलोक यात्री व शिवराज सिंह को भी उनकी सृजनशीलता व समाजसेवा के लिए सम्मानित किया गया। विशेष आकर्षण स्टेज पर रवि यादव द्वारा आनंद बख़्शी के सुपुत्र राकेश बख़्शी का लिया गया साक्षात्कार रहा। उनके अनुभवों व संस्मरणों को सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं।
गरिमामयी उपस्थिति रही :
मंच सचालन कवयित्री ममता किरण ने किया। जबकि जया रावत, डॉ. सुनीता, वागीश शर्मा, सुभाष अखिल, सुरेंद्र शर्मा, नेहा रावत, प्रवीण त्रिपाठी, उत्कर्ष गर्ग, विपिन राजभर, अनिल शर्मा, इन्जी. यश शर्मा एवं अनेक प्रतिष्ठित लेखिकाओं और साहित्यिक हस्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस शाम को और ऐतिहासिक बना दिया।


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