राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
राजस्थान की कामां विधानसभा सीट भगवंता सिंह का नाम आते ही पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा ने यहां से महिला उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इसके बावजूद भगवंता सिंह कामां के युवकों की पहली पसंद बन गए हैं। इससे एक तरफ जहां यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार कामां बदलाव चाहता है, वहीं सियासत के बड़े-बड़े दिग्गज रणनीति बनाने में फेल होते नजर आ रहे हैं। आखिर कौन है यह भगवंता सिंह? कामां की जनता उन्हें क्यों वोट देने को तैयार है? आइए जानते हैं भगवंता सिंह की खासियत-
युवा नेता भगवंता सिंह एक किसान के बेटे हैं। उनका जन्म भरतपुर के एक जाट परिवार में 1992 में हुआ। कहावत है- ‘पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं।’ भगवंता सिंह बचपन से ही साहसी रहे हैं। एलएलबी की पढ़ाई पूरी करते ही उन्होंने ठान लिया कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, वह समाज के लिए जीएंगे। वह एक ऐसे समाज को विकसित करेंगे जो देश की तरक्की में अपनी एक छाप छोड़ दे। इसी जज्बे के साथ वर्ष 2014 में भगवंता सिंह दिल्ली पहुंच गए और वहां से व्यवसाय की शुरुआत कर बेरोजगार युवकों को वह सशक्त बनाने का काम करने लगे।
भरतपुर जिले का यह नवयुवक इतने पर ही नहीं रुका। उसने आईटी के बढ़ते दौर को नजदीक से देखा और 2019 में आईटी संस्थान की नींव रख दी। यहां तक कि जब 2020 में कोविड कहर बरपा रहा था, तब भी भगवंता सिंह अपने मिशन में लगे रहे। कोविड की भयावह स्थिति में उन्होंने लोगों को सपोर्ट किया। आप तो जानते हैं, उस समय तमाम लोग बेरोजगार हो गए थे। रोजी-रोटी छिन चुकी थी। मजदूर और मेहनतकश लोग दाने-दाने को परेशान थे। ऐसे में भगवंता सिंह ने 2021 में भारतीय एयरवेज की स्थापना कर देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान देना शुरू कर दिया।
भगवंता सिंह को शिक्षित व्यक्तित्व के साथ-साथ अब एक सफल उद्यमी के रूप में भी जाना जाने लगा। लेकिन उनके भीतर समाज सेवा की जो भूख थी, वह अभी शांत नहीं हुई। उन्होंने 2022 में समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया की सदस्यता ली और देश की इस प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था के माध्यम से वह गरीब और बेसहारा बच्चों को शिक्षा देने के लिए अपना सहयोग देने लगे। उनकी समाज को आगे बढ़ाने की सोच और जुझारू प्रवृत्ति को देखते हुए जनवरी 2023 में समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भगवंता सिंह को संस्था का संरक्षक घोषित कर दिया।
भगवंता सिंह देश के तमाम युवकों, गरीब-विधवा महिलाओं, मजलूमों और अनाथ बच्चों के लिए काम करने लगे। उनकी पीड़ा अपनी पीड़ा समझते हैं, लेकिन इस सबके बावजूद दिल के किसी कोने में यह बात हमेशा खटकती रहती कि वह अभी तक कामां के लिए कुछ नहीं कर पर रहे हैं। वही कामां जहां की माटी में वह पले-बढ़े और अब तक कई सरकारें आई-गईं, लेकिन कामां का विकास नहीं हो पाया। कामां उस तरक्की की राह पर आगे नहीं बढ़ पाया जिसे उसे सख्त जरूरत है।
और इस जरूरत को पूरा करने के लिए भगवंता सिंह अब विधानसभा चुनाव के मैदान में उतर गए हैं। किसी शायर ने कहा है- मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया।’ आज लाखों युवकों में भगवंता सिंह का चेहरा दिखता है। आईटी का क्षेत्र हो या नियम-कानून से किसी को न्याय दिलाने की बात, तरक्की की राह हो या व्यवसाय बढ़ाकर रोजगार देने का कार्य, महिलाओं के सशक्तीकरण की बात हो या युवाओं को शिक्षित कर उन्हें रोजगार देने का, भ्रष्टाचार मिटाने की जिद हो या कामां को देश-दुनिया में नाम दिलाने का अभियान, हर क्षेत्र में माहिर हैं भगवंता सिंह। जहां खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है। आज लाखों युवकों में भगवंता सिंह का चेहरा दिखता है।
भगवंता सिंह सियासत नहीं करते बल्कि काम करने में यकीन रखते हैं। अपने कार्य की बदौलत ही वह लोगों के दिलों में उतर जाते हैं। उन्होंने ठान लिया है कि अब कुछ भी हो जाए, वह कामां के लोगों को वह हर सहूलियत मुहैया कराएंगे जिस पर उनका हक है और तमाम बड़े शहरों व महानगरों में तो मौजूद है लेकिन कामां के लोग वंचित हैं।
भगवंता सिंह कहते हैं, “जनता बदलाव चाहती है। पहले की सरकारों ने यहां के लोगों का सिर्फ और सिर्फ दोहन किया है। कांग्रेस की सरकार रही हो या भाजपा की, कई जगह तो आज भी लोग बुनियादी सहूलियतों के लिए तरस रहे हैं। कॉमन शिक्षा क्या होती है, वह नहीं जानते। आईटी किसे कहते हैं, पता ही नहीं। किसान तमाम समस्याओं से घिरा है, सरकार को फुर्सत नहीं है इनकी बात सुनने की। और विपक्ष वादे पर वादे कर रहा है, लेकिन इस बार ये सभी जाग चुके हैं। इनको अब कोई नहीं बरगला सकता। किसान अपने हक के लिए वोट देगा। युवा रोजगार के लिए मतदान करेगा। माताएं-बहनें सुरक्षा के लिए वोट देंगी।”
(लोगों से की गई बातचीत और भगवंता सिंह से लिए गए साक्षात्कार पर आधारित।)


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