दिल्ली ब्यूरो, राष्ट्रीय जनमोर्चा
नयी दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद ने शनिवार को देश भर में विरोध प्रदर्शन कर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। दिल्ली में नांगलोई जिले के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर मौजूद विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग बांगड़ा ने कहा है कि बंगाल, जो कभी स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद की भूमि रही है, वहां आज हिंदुओं की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है।
बांगड़ा ने कहा कि बंगाल में जो भी हो रहा है, वह सिर्फ वक्फ का बहाना है। यह कानून मुसलमानों की सामाजिक कल्याण के प्रबंधन का है, लेकिन इसका उपयोग हिंदुओं पर अत्याचार करने के लिए किया जा रहा है। बंगाल में घर जलाए गए, दुकाने लूटी गईं, मवेशी छीन लिए गए और बहु-बेटियों की इज्जत को खतरे में डाला गया है। राज्य सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है, और इसके किसी मंत्री या मुख्यमंत्री ने अब तक पीड़ित परिवारों से मुलाकात नहीं की है। वहां के पीड़ित परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए पलायन करना पड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के संरक्षण में यह प्रायोजित हिंसा हो रही है। जब मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग वहां पहुंचा, तो उनकी एंट्री बंद कर दी गई और पुलिस के घेरे में हिंदुओं को नजरबंद किया गया, ताकि वे आयोगों के सामने अपनी बात न रख सकें। अब हिंदू समाज को सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रपति शासन ही एकमात्र उपाय है।
हिमाचल की राजधानी शिमला में भी विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन के नेतृत्व में राज्यपाल के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। उत्तर प्रदेश में मथुरा में हुए प्रदर्शन में विहिप के केंद्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव देशपांडे ने प्रदर्शकारियों का नेतृत्व करते हुए जिलाधीश के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है।
नोएडा में पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध विश्व हिन्दू परिषद व बजरंग दल नोएडा महानगर ने राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल के नेतृत्व में सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है। विरोध प्रदर्शन में सेंकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक आवाज़ में जय श्रीराम के जय घोष के साथ पश्चिम बंगाल सरकार के विरुद्ध नारे लगाते हुए रोष प्रकट किया, “हिंदुओं की ये हुंकार, नहीं सहेंगे अत्याचार!”

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