आस्था और उत्साह के साथ मनाया छठ पर्व

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। आज पूरे देश में उदित होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिनों से चलने वाले श्रद्धा-भाव से मनाए जा रहे लोक आस्था के महापर्व छठ का समापन हो गया। उदयीमान सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के लिए गुरुवार की सुबह व्रती के साथ घाट पर पूरा परिवार पहुंचा, जहां उन्होंने सूर्यदेव की आराधना की और गंगाजल व दूध के साथ अर्घ्य दिया। इससे पहले बुधवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जिले की कॉलोनियों से लेकर हिंडन के घाट तक छठ मईया की खूब छटा बिखरी। भक्तिभाव से भरे ‘सुनी न अरजिया हमार ए छठी मईया…’, ‘दिहीं आशीष हजार…’, ‘कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए…’, ‘घाट पर हमहूं अरघिया देइबे हे छठी मईया…’ जैसे लोकगीत घरों से लेकर हिंडन के घाटों तक गूंजते रहे। इंदिरापुरम स्थित शिप्रा सन सिटी के जॉगर्स पार्क में भी पूर्वा संस्कृति संरक्षण समिति के तत्वावधान में छठ पूजा का भव्य आयोजन किया गया। यहां सैकड़ों लोगों ने हर्ष-उल्लास के साथ सूर्य की आराधना की और छठी मईया का व्रत रखकर परिवार, समाज और देश के लिए सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
12 साल से रख रहे हैं व्रत:
पूर्वा संस्कृति संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ समाजसेवी सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि वह 12 वर्ष से छठी मईया का व्रत रख रहे हैं। इस बार भी जब महापर्व की शुरुआत हुई तो खरना पूजन के दिन उन्होंने मंगलवार को दिन भर निर्जला उपवास रखा। इसके बाद शाम को सूर्यास्त होने के बाद गुड़ के खीर ‘रसियाव’ और रोटी का सूर्य देव को अर्पण किया। खरना के अगले दिन यानी बुधवार को षष्ठी तिथि थी। इस दिन उन्होंने शाम को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।
‘समाज रत्न’ सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि हिंदुओं के अहम त्योहारों में शामिल छठ महापर्व को बेहत पवित्र और शुद्ध त्योहार माना जाता है। ऐसे में साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाता है। खरना पूजा यानी मंगवलार को छठ व्रतियों ने सबसे पहले स्नान किया। इसमें स्वच्छ कपड़े पहनते हैं। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की आग में साठी के चावल, गुड़ और दूध की खीर बनाई गई। इन सभी व्यंजनों को पूजा के क्रम में छठी मईया को पूरे श्रद्धा भाव के साथ अर्पित किया। इसके पश्चात स्वयं भी प्रसाद ग्रहण किया। यह प्रसाद परिवार के सभी सदस्य भी ग्रहण करते हैं। तत्पश्चात 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हुआ, जो गुरुवार की सुबह छठ पूजा के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त हो गया।
एक दिन चमत्कार जरूर होगा…
उन्होंने बताया कि ये ऋग्वेद में सूर्य पूजन, उषा पूजन, आर्य परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। धीरे-धीरे यह त्योहार प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ अब विश्वभर में प्रचलित हो गया है। छठ पूजा सूर्य, ऊषा, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी मईया को समर्पित है। दिन में गेहूं, घी व शक्कर का ठेकुआ, चावल, घी और शक्कर का लड्डू प्रसाद बनाया। बांस के बने सूप डाला, दौरा, टोकरी में प्रसाद रखा। सेब, केला, अमरूद, नींबू सहित अन्य फल भी प्रसाद के रूप में रखे गए। श्रीवास्तव के अनुसार छठी मईया संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं। पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए महिलाएं अधिकतर यह महापर्व मनाती हैं, लेकिन वह खुद पत्नी के स्वस्थ्य होने के लिए 12 वर्ष से छठ मनाते आ रहे हैं। उनका पूरा यकीन है कि छठ मईया का एक दिन चमत्कार जरूर होगा और उनकी पत्नी पूरी तरह ठीक हो जाएंगी।
डेढ़ क्वींटल बनवाया प्रसाद, 4000 लोगों में वितरित:
सुधीर श्रीवास्तव पूर्वा सांस्कृतिक संरक्षण समिति शिप्रा सन सिटी गाजियाबाद के जब अध्यक्ष थे तो उन्होंने यहां स्वीमिंग पूल बनवाया था। आज उसी स्वीमिंग पूल को छठ घाट का रूप दे दिया गया। खुद श्रीवास्तव अब समिति के उपाध्यक्ष हैं। एके वर्मा अध्यक्ष हैं। सुधीर श्रीवास्तव ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया, ‘इस बार डेढ़ क्वींटल ठेकुआ (प्रसाद) बनवाया गया। इसके लिए 75 किलोग्राम घी, 90 किलोग्राम दूध, 25 किलोग्राम नारियल बूरा, 2 किलोग्राम इलाइची आदि सामग्री की व्यवस्था की गई। यहां पर 500 से अधिक लोगों ने छठ मईया की पूजा-अर्चना की और 4000 लोगों को प्रसाद वितरण किया गया।’
महिलाओं का किया स्वागत-सम्मान:
सुधीर श्रीवास्तव के अनुसार, शिप्रा सन सिटी के जॉगर्स पार्क में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने गीत-संगीत से पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इनकी प्रतिभा को देखते हुए मीनाक्षी शाही ने जूली रानी, माया सिंह, मधु ठाकुर, मंजू वर्मा, अंजू सिंह, नीति सिन्हा आदि का स्वागत-सम्मान किया। इस अवसर पर एके सिंह, तपन वर्मा, राहुल गुप्ता, पवन कुमार, सुमित शेखर, अरविंद कुमार, राजेश मिश्रा, संतोष ठाकुर, निशांत वर्मा, राकेश श्रीवास्तव, पंकज, सलिल कुमार आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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