‘हमको भूलने के लिए किसी हकीम से मत मिलना’

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। बारादरी की महफ़िल में श्रोताओं को कई अंतर्राष्ट्रीय शायरों से रूबरू होने का अवसर मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर मासूम गाजियाबादी ने कहा कि बारादरी हिंदी उर्दू के नए तीर्थ के तौर पर अपनी पहचान दर्ज कर रही है। उन्होंने कहा “अच्छी-अच्छी ही बातें मिलेंगी, खूबसूरत नजारे मिलेंगे, इक जगह हिंदी उर्दू के तुमको जब भी दुलारे मिलेंगे। आओ हम भी जरा गौर कर लें शाखें पेड़ों से क्यों फूटती हैं, उनको मालूम है कुछ परिंदे हमको कल बेसहारे मिलेंगे।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व मुख्य नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि बदलता साहित्यिक परिवेश इस महानगर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दे रहा है। अपनी पंक्तियों पर भरपूर वाहवाही बटोरते हुए उन्होंने फरमाया ‘तुम मेरा शहर छोड़ तो सकते हो, हमको छोड़ पाने में तुमको हिम्मत लगेगी। हमको भूलने के लिए किसी हकीम से मत मिलना, वह भी यही कहेंगे हिम्मत लगेगी।’
रविवार, 12 दिसंबर को नेहरू नगर स्थित सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में आयोजित ‘बारादरी’ को संबोधित करते हुए रूस से आई सुप्रसिद्ध शायरा श्वेता सिंह ‘उमा’ ने भी अपने अशआर पर भरपूर दाद बटोरते हुए कहा, ‘मैं तो सिफर से बेनजीर हो गई, उल्फत में रांझना के मैं तो हीर हो गई।’ ऑस्ट्रेलिया से आए कुंवर दंपत्ति ने दिवंगत शायर डॉ. कुंअर बेचैन को समर्पित रचनाओं से श्रोताओं को भावुक कर दिया। प्रगित कुंअर ने कहा ‘उन्हें डर था कहीं हम आसमां को पार ना कर दें, इरादों में खड़ी उनके कहीं दीवार ना कर दें। हमारे साथ बनकर दोस्त वो चलते रहे तब तक, जब तक हमारी कोशिशें बेकार ना कर दें।’
डॉ. भावना कुंअर ने कहा ‘दुनिया बसाने में बड़ी ही देर लगती है, पुराने दिन भुलाने में बड़ी देर ही देर लगती है। करे लंबा सफर पूरा इसी कोशिश में रहते हैं, परों को फड़फड़ाने में बड़ी ही देर लगती है।’ बारादरी की संस्थापिका डॉ. माला कपूर ‘गौहर’ ने भी अपनी पंक्तियों पर भरपूर वाहवाही बटोरते हुए फरमाया ‘घर में रहते हुए माहौल बनाया जाए, दिल लगाने को कहीं और ना जाया जाए…।’
संस्था के अध्यक्ष गोविंद गुलशन ने कहा ‘सुबह होती है तो फूलों से लिपट जाती है धूप, शाम होते ही चरागों में सिमट जाती है धूप। कब जरूरत के दिनों में साथ देता है कोई, सर्दियां आते ही सूरज की भी घट जाती है धूप।’ बारादरी का आगाज सुप्रसिद्ध गीतकार नेहा वैद्य की सरस्वती वंदना ‘लेखनी तू मांग ऐसा वर…’ से हुआ। उन्होंने अपने मशहूर गीत ‘तब खिला एक फूल रूमाल पर…’ भी भरपूर दाद बटोरी। कार्यक्रम का संचालन अल्पना सुहासिनी ने किया। उन्होंने कहा ‘आज तुम से बिछड़ के देखेंगे, अपनी तकदीर पढ़ के देखेंगे…।’
मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन के ‘नवदीप’ सम्मान से सम्मानित शायर सुमित ‘दिलकश’ ने भी अपने शेरों से भरपूर दाद बटोरी। मशहूर शायर सुरेंद्र सिंघल ने अपने शेरों से महफ़िल में चार चांद लगाते हुए फरमाया ‘पहले चेहरे को खरोंचों से भरकर जाते हैं, फिर वही लोग मुझे आईना दिखाते हैं।’ कार्यक्रम में मनु लक्ष्मी मिश्रा, अनुराग मिश्रा ‘गैर’, अनिमेष शर्मा, गार्गी कौशिक, इंद्रजीत सुकुमार, सुभाष चंदर, दीपाली जैन ‘ज़िया’, तारा गुप्ता, डॉ. संजय शर्मा, सुभाष अखिल, लता पाराशर, प्रतीक्षा सक्सेना ‘दत्त’, डॉ. श्वेता त्यागी, सीमा सिंह, अरुण साहिबाबादी और रिंकल शर्मा ने भी अपनी रचनाओं पर भरपूर वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम में संजय कुशवाहा, संजय सिंह भदोरिया, आलोक यात्री, वागीश शर्मा, विनीत गौड़, वीरेंद्र सिंह राठौर, देवेंद्र गर्ग, तिलक राज अरोड़ा, अशोक कौशिक, सीमांत सोहल, रंगकर्मी अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव, सुधीर राणा, शिव प्रकाश रक्षक, विभोर वर्मा, सीमा भडाना, विजय कौशिक, सौरभ कुमार, ओंकार सिंह, हरेंद्र कुमार, विष्णु कुमार गुप्ता, राकेश शर्मा, अशोक पंडिता, निरंजन शर्मा, डॉ. माला शर्मा, अजय मित्तल, ररूपा राजपूत, अजय कुमार वर्मा, कुलदीप बरतरिया समेत बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद थे।

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