मरीजों के मसीहा हैं डॉ अशोक कुमार

'राष्ट्रीय जनमोर्चा' के संपादक श्री जितेन्द्र बच्चन से बातचीत करते हुए डॉ. अशोक कुमार

– जितेन्द्र बच्चन
आज जहां अधिकतर डॉक्टरों का उद्देश्य महज पैसा कमाना है, वहीं डॉ. अशोक मरीजों की सेवा करना अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हैं। गरीबों के प्रति सहानुभूति एवं करुणा भाव रखना उनकी आदत में शुमार है। कोई मरीज असहाय है तो उसकी सेवा में वह दिन-रात एक कर देते हैं। तभी तो उनके मरीज उन्हें अपना मसीहा मानते हैं।
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गाजियाबाद में कई साल से स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे डॉ. अशोक कुमार। अनुभव और सेवा भाव के चलते अब वह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। शहर में डॉ. अशोक कुमार को करीब-करीब सभी जानते हैं। यह उनकी ख्याति ही है कि एक रिक्शा वाला उनका नाम लेते ही उनके क्लीनिक पर पहुंचा देता है। अशोक जी के परिवार में पहले कोई डॉक्टर नहीं था। आज वह खुद तो एक अच्छे चिकित्सक हैं ही, पत्नी गीता को भी उन्होंने एक बेहतरीन डॉक्टर बनने में पूर्ण सहयोग किया है।
वर्ष 2007 में डॉ. अशोक कुमार ने गाजियाबाद के विजयनगर में ‘दीप मूर्ति क्लीनिक’ की स्थापना की, जो आज करीब-करीब सभी तरह के मरीजों के ठीक होने का केंद्र बन चुका है। ऐसा हम नहीं बल्कि क्लीनिक पर आने वाले मरीज बताते हैं। उनका कहना है कि डॉ. अशोक कुमार एक बेहतरीन फिजिसियन हैं।
डॉ. अशोक कुमार ने सेवा भावना की प्रेरणा अपने पिता स्वर्गीय श्री प्रीतम सिंह से ली थी। उसके बाद मानवता की सेवा में अपना जीवन लगा दिया है। डॉ. अशोक बताते हैं कि उनके पिता ने मामूली तौर पर शिक्षा हासिल की थी। घर की माली हालत उन दिनों अच्छी नहीं थी। इसलिए अशोक जी की प्राथमिक शिक्षा भी सरकारी स्कूल में ही जैसे-तैसे हुई। हाई स्कूल में जब गए तो कॉपी-किताब की बहुत दिक्कत हुई। तब उनके एक सहपाठी ने अपनी किताबें अशोक जी को दी और उसी की बदौलत डॉ. अशोक 10वीं पास हो गए लेकिन उनका दोस्त हाई स्कूल नहीं पास कर पाया। वह फेल हो गया, जिसका अशोक जी को आज भी बहुत मलाल है।
अशोक जी ने 1996 में सीपीएमटी क्लीयर किया और एक चिकित्सक की सभी ज्ञान अर्जित करने लगे। वह कहते हैं, “हम पैसे कमाने के मनोरथ से नहीं बल्कि लोगों की सेवा करने के मकसद से डॉक्टर बने हैं।” यही कारण है कि डॉ. अशोक आज अपना अधिकतर समय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा आयोजित मेडिकल कैंपों में बिताते हैं। उन्होंने गरीबों के सहायतार्थ अपनी भी एक गैर लाभकारी एवं गैर सरकारी संस्था ‘गंगा न्यूज फाउंडेशन’ की स्थापना की है।
डॉ. अशोक कुमार की सेवा भावना से प्रेरित उनके सहयोगी डॉक्टरों की टीम गरीब, असहाय एवं दिव्यांग बच्चों के स्वास्थ्य जांच के लिए समय-समय पर हेल्थ कैंप आयोजित करते रहते हैं। डॉ. अशोक कुमार बताते हैं, “एक बार मेरी मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई। उनका उपचार शहर के कई बड़े अस्तालों में कराया। बहुत पैसा खर्च हुआ। हर किसी के वश की बात नहीं है कि वह इन बड़े अस्पतालों में अपना उपचार करा सके। हमने उसी समय ठान लिया कि मैं हमेशा गरीबों, मजदूरों व लाचार का उपचार नि:शुल्क करुंगा और यह सिलसिला मरते दम तक जारी रहेगा।”
डॉ. अशोक लोगों से भी अपील करते हैं कि जो सक्षम और संपन्न हैं, उन्हें समाजसेवा में योगदान करना चाहिए। खुद डॉ. अशोक कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। देश के स्वेच्छिक संगठन ‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के वह महानिदेशक हैं।
डॉ. अशोक एक लंबे अर्से से डॉक्टरी पेशे में हैं। अच्छा अनुभव है। राहुल विहार की नीलम बताती हैं कि नब्ज पकड़ते ही रोगी की बीमारी खोज लेते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी गीता को भी डॉक्टर बना रखा है और क्लीनिक पर जिन लोगों को डॉ. अशोक ने नौकरी दे रखी है, उनसे भी यही अपेक्षा रखते हैं कि वे भी एक दिन डॉक्टर बनेंगे।
डॉ. अशोक कहते हैं, “हर डॉक्टर को चाहिए कि वह समाज सेवा करे। खासकर मरीजों की सेवा करना एक डॉक्टर का परम धर्म है। डॉक्टरी पेशे में सेवा भावना सबसे महत्वपूर्ण है। मरीजों की पीड़ा समझकर उसकी हर मदद करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या वर्ग का हो। हमें अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग कर हर मरीज की देखभाल करनी चाहिए। उसे स्वस्थ बनाने में कोई कोरकसर नहीं छोड़नी चाहिए। क्योंकि मरीजों की सेवा करना मानवता की सेवा करना है।”
डॉ. अशोक कुमार कहते हैं, “जब एक डॉक्टर अपने मरीजों को ठीक करने में सफल होता है, तो उसे आत्मिक संतुष्टि मिलती है। यह संतुष्टि किसी भी पैसे से बढ़कर होती है। इसलिए एक डॉक्टर को अपने पेशे के प्रति हमेशा समर्पित और मरीजों की भलाई के लिए तत्पर रहना चाहिए।”
कोरोना महामारी के दौरान डॉ अशोक लगातार सेवाएं दे रहे थे। उनकी जानकारी में अगर कोई भूखा-प्यासा होता था तो उसकी पूरी सहायता करते थे। किराया-भाड़ा, जूते-चप्पल, कपड़े और दवा आदि सबकुछ दिलाकर उसे भेजते थे। उनकी तरफ से प्रतिदिन 1500 लोगों के खाना-पानी की व्यवस्था की जाती थी। लाइन पार क्षेत्र की जितनी पुलिस चौकी थीं, सभी में डॉक्टर अशोक मिनरल वाटर की सप्लाई कराते थे। उनकी इसी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए देश प्रदेश की कई सामाजिक संस्थाओं व संगठनों ने डॉ अशोक को कई बार सम्मानित किया है।
भारत के स्वेच्छिक संगठन ‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने डॉ. अशोक कुमार को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा के लिए ‘समाज रत्न’ और ‘राष्ट्र गौरव’ सम्मान से नवाजा है। इसके अलावा और भी कई अवार्ड उन्हें प्राप्त हैं। गरीबों की सहायता एवं मरीजों की स्वास्थ्य सेवा में आज भी डॉ. अशोक कुमार दिन-रात तल्लीन रहते हैं। उनका सपना था एक सर्जन बनने की, तभी तो कहते हैं, “हमारी प्राथमिकता मात्र मरीज को बचाना है।”
(डॉ अशोक कुमार से ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ के संपादक जितेन्द्र बच्चन द्वारा की गई बातचीत पर आधारित।)

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