राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर PIIT के चेयरमैन एवं समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया के मुख्य संरक्षक प्रोफेसर (डॉ.) भरत सिंह ने शनिवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही उन्होंने सावित्रीबाई फुले को नारी सशक्तिकरण की प्रतीक और देश की पहली महिला शिक्षिका बताते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा और शिक्षा के माध्यम से समाज के परिवर्तन के लिए समर्पित था। सावित्रीबाई फुले समानता, न्याय और करुणा के सिद्धांतों के प्रति समर्पित थीं। उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त साधन है।
डॉ. भरत सिंह ने समाज में शिक्षा, समानता व महिला अधिकारों के लिए सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा, “सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर हम उस अग्रणी समाज सुधारक को स्मरण करते हैं जिन्होंने सेवा और शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थीं। जरूरतमंदों के लिए उनका काम हमेशा सराहनीय रहा।” उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई का मानना था कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे शक्तिशाली साधन है। इसलिए उन्होंने ज्ञान और अध्ययन के जरिए जिंदगी में परिवर्तन लाने पर जोर दिया।
शनिवार को सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं समाज चिंतक जितेन्द्र बच्चन ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के मूल अधिकार से जोड़कर नारी सशक्तिकरण को नई दिशा दी। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए देश के पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की और समाज सुधार की अलख जगाई। उनका प्रेरणादायी जीवन राष्ट्र निर्माण में सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा। बच्चन ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “नारी शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष करने वाली महान समाज सुधारिका, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, श्रद्धेय माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों-वंचितों और नारी उत्थान के लिए आपने जो अभूतपूर्व कार्य किए हैं, वे सदैव समाज के नवनिर्माण के लिए हम सबको प्रेरित करते रहेंगे। उनकी जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।”


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