राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मुजफ्फरपुर। नया टोला स्थित शहर की प्राचीनतम संस्था संकेत द्वारा थियोसोफिकल लाज में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चित्तरंजन सिन्हा कनक ने की। समारोह में साहित्यकार प्रियंवदा दास, डॉ लोकनाथ मिश्र, देवेन्द्र कुमार एवं अमिताभ कुमार को महाकवि रमण सम्मान से सम्मानित किया गया।
शुक्रवार को आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि डॉ संजय पंकज ने रमण जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रमण जी मुजफ्फरपुर ही नहीं बल्कि बिहार के साहित्यकारों के बीच समादृत थे। उनकी रचनाएं सहज, सरल और बिना लाग-लपेट की होती थीं। उनके अंदर-बाहर में कोई फर्क नहीं था।
विशिष्ट अतिथि उदय नारायण सिंह ने रमण जी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह स्वभाव से अक्खड़ और जेब से फक्कड़ थे। प्रगतिशील विचारधारा के प्रतिभाशाली कवि थे। उन्होंने चार दर्जन से अधिक पुस्तकें विभिन्न विधाओं में लिखीं। मूलतः स्वभाव से विद्रोही कवि/साहित्यकार थे। डॉ शारदाचरण ने कहा कि रमण जी जितने शालीन और सरल थे, उतने ही वे प्रगतिशील विचारों के थे। उनकी सोच सर्वहितकारी थी।
सम्मान समारोह में साहित्यिकी पुस्तक का लोकार्पण भी हुआ। दरभंगा समाहार मंच के अध्यक्ष अखिलेश कुमार चौधरी, सचिव अमिताभ कुमार सिन्हा, प्रेम कुमार वर्मा, डॉ हरि किशोर प्रसाद सिंह, सुरेश वर्मा, रवीन्द्र कुमार रतन, डॉ सतीश चन्द्र भगत, डॉ कृष्ण मणिश्री, डॉ चन्द्रमोहन पोद्दार, पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र, डॉ बीके मल्लिक एवं श्रीमती मणिप्रभा ने भी अपने-अपने विचार रखे। मीडिया प्रभारी रमेश प्रसाद श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया।


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