रमेश प्रसाद श्रीवास्तव
मुजफ्फरपुर। महात्मा गांधी की 155वीं जयंती पर गांधी शांति प्रतिष्ठान के तत्वावधान में बुधवार को सर्वधर्म प्रार्थना और संकल्प सभा का आयोजन किया गया। इसमें शहर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गांधीजनों ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। लंगट सिंह कॉलेज के गांधी उद्यान में गांधी-प्रतिमा के निकट एकत्रित होकर सर्वधर्म प्रार्थना की गई, गांधी को याद किया गया और उन्हें पुष्पांजलि दी गई।
गांधी के प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेणे कहिए… का सामूहिक गायन किया गया। शांति पाठ भी हुआ। सर्वधर्म प्रार्थना की अगुवाई समाजकर्मी रंजीत कुमार ने की। प्रार्थना के बाद जेपी आंदोलन के प्रमुख सिपाही डॉ हरेंद्र कुमार ने उपस्थित गांधीजनों को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी विचार अमर है और पूरी दुनिया इसे कबूलती है, क्योंकि वह संपूर्ण मानवता की रक्षा की बात करता है, सत्य-अहिंसा-शांति उसके केंद्र में है।
उन्होंने कहा कि गांधी ने सभी धर्मों को समान माना और नफ़रत को दूर करने के लिए हर ख़तरे उठाए। नोआखली इसका प्रमाण है। ऐसे समय में जब देश में नफ़रत के स्वर सुनाई देने लगे हैं, गांधी ही एकमात्र संबल हैं। गांधी का रास्ता ही भारत को एकजुट और खुशहाल बना सकता है। लंगट सिंह कालेज के प्राचार्य प्रो ओमप्रकाश राय ने कहा कि गांधी ने जिन सात पापों की चर्चा की थी, उनसे छात्रों को अपने को बचाने की जरूरत है, क्योंकि छात्र ही भारत के भविष्य हैं।
बुधवार, 2 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में गांधी को स्मरण करते हुए पूर्व प्राचार्य और कालेज सर्विस कमीशन के पूर्व सदस्य प्रो विजय कुमार जायसवाल ने कहा कि गांधी बहुत बड़े पर्यावरणविद् थे। उन्होंने प्रकृति के साथ हमेशा समन्वय की बात कही और उस अनुरूप आचरण किया। उनसे सीखने की जरूरत है।
अपनी भावांजलि देते हुए पूर्व कुलपति प्रो प्रसून कुमार राय ने कहा कि गांधी आज सबसे अधिक प्रासंगिक हैं और इस दुनिया की रक्षा गांधी के रास्ते पर चल कर ही हो सकती है। पूर्व प्राचार्य हरिनारायण ठाकुर ने कहा कि आज जब आधी दुनिया में अशांति है और युद्ध बढ़ते जा रहे हैं, शांतिकामी लोग गांधी में आशा की आखिरी किरण तलाश रहे हैं।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ अरुण कुमार सिंह ने कहा कि विवेकानंद और गांधी ने हमेशा युवाओं को समाज से जुड़ने और उसकी समस्याओं को समझने के लिए प्रेरित किया। गांधी ने तो यहां तक कहा कि इसके बिना शिक्षा एक विलासिता मात्र है। आज के युवाओं को इससे सीख लेनी चाहिए।
कार्यक्रम में रमेश चंद्र, अनिल शंकर ठाकुर, अच्युतानंद किशोर नवीन, प्रो देवव्रत अकेला, विनय प्रशांत, विक्रम जयनारायण निषाद, प्रो राकेश कुमार सिंह, डॉ हरिकिशोर प्रसाद सिंह, पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता, संजीव साहू, डॉ श्याम कल्याण, आलोक कुमार अभिषेक, डॉ साकेत कुमार, प्रभात कुमार, यशपाल कुमार, अनिल कुमार अनल, डॉ कमल किशोर, हरिराम मिश्रा, विवेक कुमार, रमेश ओझा, डॉ जयनाथ कुमार, मुकेश कुमार आदि शामिल थे। सभा का संचालन गांधी शांति प्रतिष्ठान के सचिव अरविंद वरुण ने किया, जबकि कार्य समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ कृष्ण मोहन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


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