उत्तर प्रदेश में कायस्थों का उत्पीड़न चरम पर- राष्ट्रवादी विकास पार्टी

राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रवादी विकास पार्टी ने यूपी सरकार और भाजपा को घेरते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में कायस्थों को अपना बंद हुआ वोट बैंक समझ लिया है। कायस्थ समाज को जो शिक्षा तथा न्याय में विश्वास रखता है, उसे सरकार दरकिनार करते हुए उपेक्षित कर रही है। परिणामस्वरूप कायस्थों को समस्त प्रकार का उत्पीड़न देखना पड़ रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्वत ने यूपी सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि राष्ट्रवादी विकास पार्टी हर प्रकार के अत्याचार, अन्याय और उत्पीड़न का विरोध करती है। यदि कायस्थ समाज तथा अन्य कमजोर वर्गों व गरीबों-मजदूरों का शोषण नहीं रोका गया तो पार्टी इसके विरोध में सड़क पर संघर्ष करेगी।
उन्होंने अमेठी और लखनऊ के कई मामलों को उठाते हुए कहा कि अमेठी में शशिबाला श्रीवास्तव की जमीन पर कब्जा कर लिया गया। उन्होंने शासन-प्रशासन सभी जगह न्याय की गुहार लगाई लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज तक मौन साधे हुए हैं। अमेठी के ही एक युवक बसंत श्रीवास्तव को एक पेड़ से बांधकर कुछ दबंगों ने मार-पीटकर हत्या कर दी। लखनऊ में सीएम की सोशल मीडिया का काम देखने वाली कंपनी के कर्मचारी इंदिरानगर निवासी पार्थ श्रीवास्तव (28) ने आत्महत्या कर ली। यहां तक कि लखनऊ में भाजपा पार्षद दिलीप श्रीवास्तव पर पुलिस फर्जी मुकदमा दर्ज कर उन्हें परेशान कर रही है, तब भी सीएम योगी मौन बने हुए हैं।
प्रतापगढ़ में पत्रकार शुलभ श्रीवास्तव की हत्या:
डॉ श्रीवास्तव बताते हैं, ताजा मामला प्रतापगढ़ के पत्रकार शुलभ श्रीवास्तव की हत्या से जुड़ा है। उनकी ईमानदार छवि के चलते शराब माफिया परेशान हो गया था। शुलभ ने अपनी हत्या से पहले कई बार इस माफिया और पुलिस के गठजोड़ का पर्दाफाश कर चुके थे। उन्होंने घटना से दो दिन पहले आईजी प्रयागराज और एसपी प्रतापगढ़ को एक लिखित तहरीर देकर अपनी सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी लेकिन पुलिस लगातार लापरवाह बनी रही। अंतत: शुलभ श्रीवास्तव की हत्या कर दी गई और उत्तर प्रदेश का एक और पत्रकार शहीद हो गया। इसके बावजूद सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ चुप्पी साधे हुए हैं।
पत्नी सुरभि श्रीवास्तव गिड़गिड़ाती रही और दंबग कहर ढाते रहे:
उन्होंने बताया कि इससे पहले अमेठी जनपद के थाना कोतवाली अंतर्गत पूरे गणेश लाल मजरे भरेथा गांव के 30 वर्षीय राम भरत उर्फ बसंत श्रीवास्तव को दबंगों ने एक पेड़ से बांधकर जमकर मारा-पीटा। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि बसंत के धान की नर्सरी में मवेशी घुस आए थे। इसका उलाहना देने वह दूसरे पक्ष के पास चले गए। उन लोगों ने 2 जून 2021 को बसंत को पेड़ से बांधकर बुरी तरह मारा-पीटा। पत्नी सुरभि श्रीवास्तव लोगों से पति को छुड़ाने के लिए गिड़गिड़ाती रही लेकिन दबंग कहर ढाते रहे। आरोपित बसंत को अपने घर ले गए और फिर वहां एक कमरे में बंधक बनाकर दोबारा उसकी जमकर पिटाई की। वह मनणासन्न हो गए। परिजन इलाज के लिए सीएचसी ले गए। हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल से 3 जून की सुबह लखनऊ ले जाते समय बसंत ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पिता पंकज श्रीवास्तव की तहरीर पर पुलिस ने उमेश, नीलेश, निशा और दो अन्य अज्ञात युवकों के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन मुख्यमंत्री आज तक इस मामले पर मौन हैं।
पार्थ श्रीवास्तव का मामला अब भी अनसुलझा:
राष्ट्रवादी विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ श्रीवास्तव का कहना कि तीसरा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सरकार की सोशल मीडिया का काम देखने वाली कंपनी के कर्मचारी इंदिरानगर निवासी पार्थ श्रीवास्तव (28) से जुड़ा है। पार्थ ने लखनऊ में ही फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उससे पहले उसने सुसाइट नोट में लिखा था, ‘मेरी आत्महत्या एक कत्ल है’ और कुछ लोगों के नाम भी बताए थे, लेकिन पुलिस ने एफआईआर तक नहीं दर्ज की। बाद में जांच शुरू भी की तो आज तक उसका कोई नतीजा नहीं निकला। साथ ही सबूतों से भी छेड़छाड़ की गई है। इस मामले में राष्ट्रवादी विकास पार्टी ने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कई राज्यों में धरना-प्रदर्शन भी किया लेकिन सीएम की चुप्पी बरकरार है।
अपनी ही पार्टी के पार्षद पर फर्जी मुकदमा:
उन्होंने कहा कि हद तो तब हो गई जब सत्ता पक्ष यानी भाजपा के ही एक पार्षद दिलीप श्रीवास्तव के खिलाफ लखनऊ पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया। दरसअल, फैजाबाद रोड स्थित लेखराज मार्केट के पास एक प्लाट में पेड़ के नीचे हनुमान की मूर्ति रखी थी। मंगलवार, 1 जून 2021 की दोपहर इस मूर्ति को हटा दिया गया और पुजारी का पुलिस ने मोबाइल छीन लिया। इसके विरोध में दिलीप श्रीवास्तव ने गाजीपुर पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए समर्थकों के साथ प्रदर्शन करने लगे। सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और दिलीप व उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। तब भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खामोश हैं। यह कायस्थों का उत्पीड़न-शोषण नहीं तो और क्या है?
उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो सड़क पर उतरेगी राविपा:
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्वत ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि राष्ट्रवादी विकास पार्टी हर प्रकार के अत्याचार, अन्याय और उत्पीड़न का विरोध करती है। यदि कायस्थ समाज तथा अन्य कमजोर वर्गों व गरीबों-मजदूरों का शोषण नहीं बंद हुआ तो पार्टी इसके विरोध में सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होगी।
कायस्थ समाज से जारी है भेदभाव:
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो जनसंघ के दिनों से भारतीय जनता पार्टी के लिए वोट कर रहा कायस्थ समुदाय अपने को आहत और निर्वासित महसूस कर रहा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने पिछले दिनों 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी का नेतृत्व करने के लिए 42 पदाधिकारियों को शामिल करते हुए एक नई कार्यकारिणी की घोषणा की लेकिन किसी कायस्थ नेता को एक भी पद नहीं दिया गया। इससे पहले पिछली कार्यकारणी में भी कायस्थों के साथ भेदभाव हुआ था। राष्ट्रवादी विकास पार्टी के मुखिया डॉ अनूप श्रीवास्तव ने भापजा से सवाल करते हुए कहा है कि बीजेपी के पास कोई कायस्थ महापौर या एमएलसी तक नहीं है। इसके अलावा कायस्थ समाज के किसी भी सदस्य को राज्यसभा या किसी राज्य का राज्यपाल तक नहीं बनाया गया। यह अनदेखी और अत्याचार नहीं है तो क्या है?

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