“दिल दिया है जान भी देंगे ये वतन तेरे लिए…”

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। थीम पवेलियन, भारत मंडपम, विश्व पुस्तक मेला में अद्विक पब्लिकेशन द्वारा “द कंट्रीब्यूशन ऑफ आनंद बख्शी : ए पोएट एंड लिरिसिस्ट” का आयोजन किया गया। वातावरण में दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी पर भारतीय सेना को समर्पित भावपूर्ण गीत “दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिये…” गूंजता रहा। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ने वातावरण को राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कर दिया।
पैनल चर्चा में राकेश आनंद बख्शी, यूसुफ खान, संगीता विजित और शालिनी अगम उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में राकेश आनंद बख्शी ने पिता के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनके पिता के गीत केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि वे आम जन की भावनाओं, देशप्रेम और जीवन के यथार्थ को स्वर देते थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि यूसुफ खान, जो एक प्रतिष्ठित संगीतकार हैं और फिल्म एवं संगीत जगत की कई नामी हस्तियों के साथ काम कर चुके हैं, ने आनंद बख्शी की बायोग्राफी ‘नगमे किस्से बाते यादें’पर चर्चा करते हुए कहा कि यह कृति न केवल एक गीतकार की जीवन यात्रा को दर्शाती है, बल्कि हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर का भी दस्तावेज है।
मंच संचालन ऋषि कुमार शर्मा (पूर्व उप-सचिव हिन्दी अकादमी) ने किया। अद्विक पब्लिकेशन के निदेशक अशोक गुप्ता ने आये हुये सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। इससे पहले संगीता बिजित ने देशभक्ति गीत “वतन वालों वतन न बेच देना, ये धरती ये गगन न बेच देना…”गीत प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम आनंद बख्शी के साहित्यिक योगदान, देशभक्ति की भावना और भारतीय सांस्कृतिक चेतना की एक यादगार छाप छोड़ी।

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