राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
राजस्थान की कामां विधानसभा सीट को लेकर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बीजेपी ने कामां विधानसभा सीट से नौक्षम चौधरी को मैदान में उतारा है। नौक्षम पैराशूट प्रत्याशी हैं। यही कारण है कि भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता और कई बड़े नेता भी बीजेपी हाईकमान के इस फैसले से नाराज हैं। बाहर से लाई गई प्रत्याशी को वे कताई मंजूर नहीं कर रहे हैं। भारी विरोध हो रहा है। कुछ लोग तो बगावत के मूड में हैं और जो खुलकर सामने नहीं आ सकते, उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी भगवंता सिंह को समर्थन देने का मन बना लिया है। कमोबेश यही हालत कांग्रेस की भी हैं। अधिकतर कांग्रेसी जाहिदा खान से नाराज हैं। दोनों पार्टियों के भितरघात का फायदा निश्चित ही युवा नेता भगवंता सिंह को मिल सकता है।
डीग जिले की कामां विधानसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य मानी जाती है। इस विधानसभा में 2 लाख 54 हजार वोटर हैं, जिसमें से 1 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कामां विधानसभा सीट पर जवाहर सिंह बेढ़म को अपना प्रत्याशी बनाया था और कांग्रेस ने जाहिदा खान को मैदान में उतारा था। जाहिदा खान ने करीब 40 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। गहलोत सरकार में वह मंत्री भी हैं, लेकिन कामां के विकास में उनकी कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखी। धीरे-धीरे पांच साल पूरे होने को हैं पर कामां में कोई खास तरक्की नहीं दिखती।
कामां के मतदाता कहते हैं, “अब बदलाव ही एक रास्ता है। वर्ष 2018 से पहले बीजेपी की सरकार थी, तब भी यहां कोई तरक्की नहीं हुई। बाद में कांग्रेस की सरकार बनी तो हालात और बदतर हो चुके हैं। बेरोजगारी लगातार बढ़ी है। शिक्षा और महिला सशक्तीकरण को लेकर जो वादे किए गए, एक भी पूरा नहीं किया गया। अब इस बार के चुनाव में बीजेपी ने बाहर से लाकर उम्मीदवार थोप दिया है। कांग्रेस में अलग घमासान मचा है। कामां की किसे चिंता है?”
कामां के कल्लन मियां (65) से बात की तो वे एकदम से फूट पड़े, “कांग्रेस हो या बीजेपी, सभी सियासत की रोटी सेंकने में लगे हैं। कोई कौम के बीच फूट डालकर फायदा उठाना चाहता है तो कोई हिंदू-मुस्लिम की बात कर अपना उल्लू सीधा करने की फिराक में है। कामां के दुख-दर्द से किसी का कोई नाता-रिश्ता नहीं है।” कल्लन मियां आगे किसी सधे नेता की तरह बात करते हैं। कहते हैं, “यहां की समस्याओं को वही समझ सकता है जो खुद यहां पला-बढ़ा हो। कामां की माटी से उसका नजदीक का नाता हो। और इन सारी खूबियों पर एक ही शख्स खरा उतरता है- भगवंता सिंह!”
भगवंता सिंह कामां सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। किसी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया है लेकिन हर पार्टी पर वह अभी से भारी पड़ रहे हैं। उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगानी शुरू कर दी है। युवा नेता हैं। पढ़ा-लिखे और आईटी क्षेत्र के जानकार माने जाते हैं। समाजसेवी होने के साथ-साथ उनको बेरोजगारों और अपना कारोबार करने वालों की जो समस्याएं हैं, उसकी चिंता भी है। कामां के ही कुछ लोग बताते हैं कि भगवंता सिंह के पास कामां के विकास के कई योजनाएं हैं। अंदरखाने की मानें तो भाजपा और कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ता उनके साथ हैं। और यही वह तरकीब है जो भगवंता सिंह की कामां से जीत पक्की करती है!


Leave a Reply